केंद्रीय राजनीति के सरताज ‘पगड़ीधारी’ सांसद वीरेन्द्र सिंह ‘मस्त’ किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। देश में ‘जमीं’ से लेकर ‘संसद’ तक इनकी ‘पहलवानी’ के ‘किस्से’ चर्चित हैं। यूं तो राजनीति के वरिष्ठ व उम्रदराज खिलाड़ी हैं लेकिन संसद में मर्यादा भंग करने वाले युवा सांसदों को भी कुश्ती के लिये जब ललकार देते हैं तो बड़े-बड़े की सिट्टी-पीट्टी बंद हो जाती है। खैर..किसानों के राष्ट्रीय अध्यक्ष बतौर उनकी समस्या व पीड़ा को भी संसद में इन्होनें ना कि मजबूती से रखा बल्कि कर्जमाफी व सम्मान योजना सहित बहुत कुछ शुभारंभ भी करवाया।
जगजाहिर है कि उत्तर प्रदेश के विंध्यवासिनी धाम के इर्द-गिर्द यांनि मिर्जापुर इनकी कर्मभूमि रही और विभक्त भदोही लोकसभा क्षेत्र को भी सांसद बतौर इन्होनें संवारनें में कोई कोताही नहीं छोड़ी। मुख्यत: भदोही जनपद वासियों को राजनैतिक धर्म निभाते हुये लोकतांत्रिक पाठ पढ़ाने में भी महारत हांसिल की। कुछ मुद्दों पर बतौर ‘ग्राउंड रिपोर्टिंग’ भदोही के सांसद वीरेन्द्र सिंह ‘मस्त’ की ‘अलोचना’ लिखने का हमें भी सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान काफी करीब से अनुभव हुआ कि भदोही के एक भाजपा पदाधिकारी जय कुमार सिंह इन्हें राजनैतिक संत यूं ही नहीं कहते थे बल्कि राजनैतिक संस्कार-संस्कृति के साथ लोकतांत्रिक विधा से सांसद लैश थे। मुझे याद है कि विकास कार्यों में जो चूक पदाधिकारियों व शासनिक अधिकारियों से हुई थी उसकी भी जिम्मेदारी लेते हुये इन्होनें कहा था कि ‘अब जो बीत गया उस पर हायतौबा मचाने से अच्छा है कि मैं खुद नजर बनाकर रखूंगा”। एक सवाल के जवाब में वीरेन्द्र सिंह ‘मस्त’ का ‘अलोचक’ को मुस्कुराते हुये यह जवाब कि ”मैं पत्रकारों से कुश्ती नहीं लड़ता और हमें उनसे जितना भी नहीं है”। फिलहाल वही सांसद अपने पुश्तैनी गृह जनपद बलिया से सांसद हैं। विगत् महीने पूर्व अस्वस्थ भी थे लेकिन नये अंदाज में ‘जन्मभूमि’ को संवारनें के लिये सौगात देने हेतु तैयार हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने २४ नवंबर की भोर में लिखा है कि “आज लोकसभा बलिया में आ रहे प्रिय भाई केशव जी का स्वागत अभिनन्दन है। मा० मंत्री केशव जी बलिया लोक सभा के कई महत्वपूर्ण सडके जो अत्यंत खराब है और महत्वपूर्ण मुख्य मार्ग है हमारी उनसे वार्ता हो चुकी है सारा स्टीमेट मंगा लिए है। कल चितबडागाव कार्यक्रम में कई सड़को के बनने कि घोषणा करेगे। इस के हृदय से धन्यवाद पुरे बलिया के तरफ से।”



