जिलाध्यक्ष पद लीजिये, विधायकी का समर्थन दीजिये.!

उत्तर प्रदेश का लाडला भदोही जनपद पुर्वांचल की राजनीति का केंद्र कहा जाता है। इस ‘डालर नगरी’ का प्रेम जिसे मिला, उसका दिल कहीं और नहीं लगता। यह अलग बात है कि पुश्तैनी राजनैतिक विरासत को भी यहां करीबी व ‘पुत्र नरेश’ ही तबाह करते हैं। फिर सिंहासन के लिये भटकते हैं। कुछ ऐसा ही ‘राजनैतिक’ नहीं लेकिन ‘कुटिनीतिक’ परिदृश्य दर्पणित हो रहा है।

प्रतिक्रिया sashaktsamaaj@gmail.com पर दीजिये और हिंदी में होने पर सशब्द प्रकाशित किया जायेगा….

जी हां..भदोही भाजपा जिलाध्यक्ष पद की बमचख के पीछे विधायक-सांसद के करीबी व परिवार सदस्यों की कुटिनीतिक चाल जगजाहिर हो चुकी है। विधायकी की चौखट (२०२२) के लिये तैयारी में जुटे सियासी खिलाड़ियों हेतु यह संगठन चुनाव किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। जब भदोही जनपद के तीनों विधान सभा क्षेत्र के विधायक अपने-अपने समर्थकों के लिये ताकत झोंक ही दिये तो आखिरी दांव पूर्व भदोही सांसद सपूत यांनि विपुलेन्द्र प्रताप सिंह (प्रताप) का भी तो बनता ही है। भदोही भाजपा के कुछ पदाधिकारियों का अनौपचारिक विश्लेषण मानें तो भदोही विधान सभा सीट पर कई राजनेताओं की नजर गड़ चुकी है। इस सीट पर पूर्ववत से प्रताप सिंह इच्छा जताते रहे हैं लेकिन जैसे ‘जिलाध्यक्ष’ पद हेतु ‘मंडल अध्यक्ष’ रूपी प्रस्तावक की जरूरत थी, वैसे ही ‘विधायकी’ के ‘टिकट प्रस्ताव’ हेतु ‘जिलाध्यक्ष’ का विशेष जरूरत पड़ेगी। यकीं मानिये कि समर्थन की एडवांस बुकिंग भी चल रही है कि ‘जिलाध्यक्ष पद लीजिये, विधायकी का समर्थन दीजिये।

यहां भले दांव फेल, खेल बाकी है..जैसे औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर ने अपने करीबीयों के लिये प्रस्तावक जुटा लिया था, वैसे ही भदोही विधायक ने अपने करीबी प्रत्याशी का समर्थन कर दिया था। ऐसे में भाजपा समर्थक ज्ञानपुरिया विधायक विजय मिश्रा की चौखट सुनीं कैसे रहती। यहां तो एक (महामंत्री) भाजपा पदाधिकारी को बधाई के साथ रिश्तेदारों की व्यवस्था में विधायक की ‘औराई कंपनी’ द्वारा वायरल आडियो ही गवाही दे रहा है। हालाकि बड़े-बड़े विधायक-सांसदों का दांव यहां संगठन द्वारा प्रस्तावक विषयक तत्काल प्रभाव से लिये ‘मंडल अध्यक्ष’ की खरीद-फरोख्त को झटका दे दिया और ज्यादा से ज्यादा ५ के बजाय ५५ दावेदार प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन खेल अभी बाकी है…

हम किसी से कम नहीं..भदोही संसदीय क्षेत्र का ‘राज’ भोग चुके सांसद सपूत प्रताप सिंह भी शायद पिछड़े नहीं और भाजपा पदाधिकारियों में चर्चा है कि इन्होनें पिछले सप्ताह बलिया से आकर भदोही में कई ‘मण्डल अध्यक्षों’ को पूर्व भदोही सांसद के विकास कार्यों का प्रतिनिधित्व करने वाले शैलेन्द्र दूबे उर्फ ‘टुन्ना’ के लिये प्रस्तावक भदोही ब्लाक प्रमुख प्रशांत सिंह उर्फ़ ‘चिट्टू’ के साथ हथियारबंद डेरा जमाकर तैयार कर लिया था।

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संसदीय सत्ता के घनिष साथी…भदोही सांसद के प्रतिनिधि रहे शैलेंद्र दूबे उनके बेटे प्रताप सिंह ‘राजभोग’ में घनिष्ठ साथी रहे है। यदि शैलेन्द्र दूबे को जिलाध्यक्ष बनाने में वर्तमान बलिया सांसद की राजनैतिक पैठ से सांसद सपूत प्रताप सिंह कामयाब होते हैं तो वे भी ‘एक तीर से कई शिकार’ करने में सक्षम हो जायेगें। भदोही जनपद में ‘राज’ के साथ भदोही विधान सभा सीट के लिये प्रस्तावक बतौर शैलेन्द्र दूबे भूमिका निभायेगें। इतना ही नहीं शैलेन्द्र दूबे उर्फ ‘टुन्ना’ की भी भदोही विधान सभा सीट पर नजर है लेकिन वे जिलाध्यक्ष अध्यक्ष पद रहते नहीं लड़ पायेगें।

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ऐ जोड़ी भाजपाईंयों को नहीं पसंद…भदोही के राजनेताओं को ऐ जोड़ी रास नहीं आ रही क्योंकि भदोही सांसद बीरेन्द्र सिंह ‘मस्त’ के संसदीय क्षेत्र ‘प्रतिनिधित्व’ काल में जनपद में दलाली का ऐसा दौर सुर्खियों में रहा कि इसी जोड़ी की वजह से भदोही से सर्वश्रेष्ठ सांसद उपाधि प्राप्त ‘राजनैतिक संत” को पार्टी ने बलिया भेज दिया। यहां तक कि सांसद निधि आवंटन पूर्व ४०% कमीशन स्कूलों-विद्यालयों से वसूलने का इस जोड़ी पर आरोप लगा था।

कांग्रेसी बैकग्राउंड – भदोही भाजपा राजनेताओं का विश्लेषण मानें तो भाजपा के ख़िलाफ़ शैलेन्द्र दूबे पारिवारिक स्वार्थ में प्रचार करते रहे हैं क्योंकि पुश्तैनी बैकग्राउंड कांग्रेसी है। इनके सगे चाचा डॉक्टर देवेंद्र दूबे औराई से विधायकी का चुनाव लड़ने के साथ कांग्रेसी संगठन में भी रहे हैं। थाना औराई में ‘विशेष उपाधि’ भी दर्ज बताईं जा रही है। खैर..’सशक्त समाज’ न्यूज नेटवर्क निरंतर जिलाध्यक्ष चुनाव को लेकर गहरी राजनैतिक पैठ विश्लेषण जहां प्रकाशित कर रहा है, वहीं भाजपा के संगठन प्रदेशाध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह भी ऐसे तटस्थ भाजपाईंयों को तलाश रहे हैं, जिसकी जनपद वासियों में गहरी पैठ हो या स्वच्छ छवि के साथ किसी विधायक-सांसद का नीजी समर्थक ना हो।

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