उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद की राजनीति से भाजपाई विचारधारा का कत्लेआंम होता नजर आ रहा है, जहां दलबदूओं के शातिराना अंदाज से तटस्थ व बुजुर्ग भाजपाईयों का विधायकी-सांसदी के टिकट से हलाकन हुआ, वहीं मिर्जापुर के बाद भदोही में भी भाजपा संगठन पर ‘दलबदूओं की हूकूमत’ करीब पहुंचते देखते ही भाजपाईयों में हाहाकर मच चुका है। ऐसा हम नहीं कह रहें हैं बल्कि विभिन्न हलाकन झेलने के बाद अब 20 नवंबर को होने वाले भाजपा जिलाध्यक्ष के चुनाव को लेकर कई सनसनीखेज तथ्यों का खुलासा खुलेआमं पुश्तैनी भाजपा से जुड़े युवा ही कर रहे हैं।
गौरतलब है कि भदोही जनपद में औराई-भदोही दोनों विधायक दलबदल भाजपा में आये हैं, वहीं ज्ञानपुर विधायक निषाद पार्टी गठबंधन बतौर भाजपा की नीतियों के समर्थक हैं। औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर संगठन के परिपक्क खिलाड़ी माने जाते हैं, बताया जा रहा है कि वामसे, बसपा, सपा, बसपा होते हुये भाजपा पहुंचे विधायक को संगठन का महत्व पता है। इसके साथ ही बसपा से आये भदोही विधायक रविन्द्र नाथ त्रिपाठी को भी सदैव संगठन पदाधिकारियों के सहयोग से वंचित रखा गया था लेकिन संगठन चुनाव के करीब आते भदोही विधायक के प्रति औराई विधायक व चुनावी खेल में शामिल कुछ संगठन पदाधिकारियों का प्रेम छलका है। इस खेल में कुछ मंडल अध्यक्ष भदोही विधायक के खेमें के भी भले ही मनोनीत या निर्विरोध हो उठें हैं लेकिन जिलाध्यक्ष पद पर औराई विधायक ने अपने करीबी हेतु कुंडली मार दिया है। यदि यह खेल सफल हुआ तो औराई विधायक ‘एक तीर से कई शिकार’ करने में कामयाब हो जायेगें। वरिष्ठ भाजपाई कहते है कि भदोही क्षेत्र में ‘भदोही के तीन लाल,…….. ‘ नामक लगे बैनर लगने के बाद भी मंत्री पद व सांसदी चुनाव टिकट में रोड़ा बने भदोही विधायक रविन्द्र नाथ त्रिपाठी को तो नये जिलाध्यक्ष से ठीकाने लगवा ही दिया जायेगा। फिलहाल सशक्त को भाजपाईयों को मंडल अध्यक्ष व जिला प्रतनिधि चुनाव से लेकर आनन-फानन में हो रहे जिलाध्यक्ष चुनाव में तो ठीकाने लगा ही दिया गया है।अब तो भाजपाई खुद ‘दलबदलू हूकूमत’ संगठन में समाहित होनें से पूर्व ही गाथा गाते हुये लखनऊ-दिल्ली संगठन नेताओं की घंटी बजा रहे हैं। औराई विधायक के खासम-खास कहे जाने वाले जिला महामंत्री राजेन्द्र दूबे से उनके मोबाइल क्रमांक 9415443838 पर सोमवार को संपर्क किया गया, जहां वे उपलब्ध नहीं हो सकेे।
हम पार्टी से हैं और पार्टी हमसे नहीं…– ‘सशक्त समाज’ न्यूज नेटवर्क के विशेष धारावाहिक में संगठन चुनाव को लेकर औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर की प्रतिक्रिया ली गई, “वे कहते हैं कि ‘हम पार्टी से हैं, पार्टी हमसे नहीं..पार्टी के आदेशों का पालन ही हमारा धर्म है। हमनें किसी भी करीबी हेतु सिफारिश चुनाव अधिकारियों से नहीं की है। 18 सदस्यीय टीम में से किसी ने हमसे कोई सलाह भी नहीं मांगा था”।

ऐसे छलक रहा है पूर्व पदाधिकारियों का दर्द – पार्टी द्वारा भेजी गयी नियमवाली को तोड़ते हुए मंडल अध्यक्ष का चुनाव कराया गया है। हमारे प्रदेश के नेताजी कहते हैं कि जो भी जमीनी कार्यकर्ता है उसको नियम कानून से ऊपर उठाया जायेगा पर चुनाव अधिकारी कुछ अलग ही करते हैं।


