महादेव’ को आखिर क्यों कहा जाता है ‘निलकंठ’, भगवान विष्णु का स्मरण करके…

जेकर नाथ ‘भोलेना, ऊँ अनाथ कइसे होईअ…भोलेबाबा के भक्तों में यह धून व स्वर हृदयतल गुंजता है और वे बड़ी-बड़ी समस्याओं से निजात पा लेते हैं। कई दिव्य स्वरूप में पूजे जाने वाले भोलेनाथ को महादेव के साथ नीलकंठ भी कहा जाता है। इसका पीछे कई पौराणिक कथाओं का रहस्य है और एक कथा के मुताबिक अमृत पाने की इच्छा से जब देव-दानव बड़े जोश और वेग से मंथन कर रहे थे, तभी समुद से कालकूट नामक भयंकर विष निकला। उस विष की अग्नि से दसों दिशाएं जलने लगीं। समस्त प्राणियों में हाहाकार मच गया। देवताओं और दैत्यों सहित ऋषि, मुनि, मनुष्य, गंधर्व और यक्ष आदि उस विष की गरमी से जलने लगे। देवताओं की प्रार्थना पर, भगवान शिव विषपान के लिए तैयार हो गए। उन्होंने भयंकर विष को हथेलियों में भरा और भगवान विष्णु का स्मरण कर उसे पी गए। भगवान विष्णु अपने भक्तों के संकट हर लेते हैं। उन्होंने उस विष को शिवजी के कंठ (गले) में ही रोक कर उसका प्रभाव खत्म कर दिया। विष के कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और वे संसार में नीलकंठ के नाम से प्रसिद्ध हुए।

प्रतिक्रिया sashaktsamaaj@gmail.com दीजिये और हिंदी में होने पर सशब्द प्रकाशित किया जायेगा….

Leave a Reply

Discover more from सशक्त समाज न्यूज़

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading