मुंबई के प्रवेशद्वार कल्याण-डोम्बिवली शहर की हालत कोरोना संकट से अति चिंताजनक हो चली है. जहां शासन-प्रशासन इस काल के कपाल से संक्रमितों की जिंदगी बचाने में जुटा है, वहीं आकड़ो को देख सियासी घमासान भी मचा है। फिलहाल विभिन्न राज्यों में भले खून जांच की गति धीमी है लेकिन महाराष्ट्र में संक्रमितों की बढ़ती संख्या बता रही है कि कोरोना लक्षण में स्वैब (खून) जांच में कोताही शासन-प्रशासन द्वारा नही बरता जा रहा है।
गौरतलब है कि कंडोमपा क्षेत्र अंतर्गत कोरोना संक्रमितों की संख्या आबादी के हिसाब से दररोज रिकार्डतोड़ समक्ष आ रहे हैं। रविवार को भी शासकीय पुष्टि रिपोर्ट में 661 कोरोना संक्रमित शामिल हुए, जिससे संक्रमितों की कुल 12,813 तक जा पहुची है। फिलहाल यहां 6269 मरीजो का जहां उपचार चल रहा है, वहीं राहत पूर्ण तथ्य यह है कि इनमें 6355 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। फिर भी आधा दर्जन से ज्यादा मौतें प्रतिदन होने से शहरवासी भयभीत हैं। रविवार को भी 8 कोरोना संक्रमितों की मौत आकड़े में समाहित हुई, जिससे अभी तक इससे मरने वालों की संख्या बढ़कर 189 हो गयी है।
कंडोमपा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारी कहते हैं कि ‘खून जांच में हम अव्वल हैं और कोताही नहीं बरत रहे हैं, जिससे संक्रमितों की पुष्टि तेजी से हो रही है. लाॅकडाऊन से कम्युनिटी स्प्रैड नहीं होता है लेकिन संक्रमण से मुक्ति भी नहीं मिलती है। फिलहाल समयानुसार यदि संक्रमितों की रिपोर्ट पाॅजिटिव मिल जाती हैं तो इलाज से जहां मरीजों को बचाने हेतु डाक्टरों की टीम प्रयारसत हैं, वहीं संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की शिनाख्त व उनके निवास परिसर को सेनिटाईजरिंग करके स्वास्थय विभाग द्वारा सतर्कता बरती जा रही है। इसी का प्रतिफल कि 50% से ज्यादा संक्रमित स्वस्थ होकर घर भी पहुंच चुके हैं।



