भदोही जनपद में बांग्लादेशी जमातियों व संरक्षकों का सलाखों में जाना तय है, जिसके लिये पुलिस ने शिकंजा कस रखा है। ऐसे में कोरोना महामारी के ऊपजे संकट से सियासी पारा भी चढ़ता-उतरता नजर आ रहा है। सबसे ज्यादा क्षेत्र में ‘तबलीगी जमात’ के ‘फाऊंडर’ को लेकर भी चर्चा चल रही है।
गौरतलब है कि भदोही के काजीपुर स्थित मरकज मस्जिद में 28 दिनों से छिपे बांग्लादेशी जमातियों का जेल जाना निश्चित है। उनके खिलाफ वीजा शर्तों के उल्लंघन के आरोप में मामला भी दर्ज किया गया है। जिला अस्पताल में क्वारंटाइन का समय पूरा होते ही पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी। संरक्षणदाता भी अंडरग्राउंड हो गए हैं। अधिसंख्य का मोबाइल फोन स्वीच आफ हो गया है। एक मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज मस्जिद के तब्लीगी जमात में शामिल हुए 11 बांग्लादेशियों सहित 14 जमातियों को काजीपुर स्थित मरकज मस्जिद के गेस्टहाउस में 28 दिनों तक छिपाकर रखा गया था। चौकन्ना हुई पुलिस की छापेमारी में 14 जमातियों को छिपाकर रखने की पोल खुल गई। इस मामले में जमातियों के अलावा इंतजामिया कमेटी के सात संरक्षण दाताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि जमातियों की वीजा अवधि खत्म हो गई है। साथ ही टूरिस्ट का वीजा लेकर धर्म का प्रचार कर रहे थे। उनके खिलाफ वीजा शर्तों और लॉकडाउन उल्लंघन के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। जमातियों को जिला अस्पताल में क्वारंटाइन पर रखा गया है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वीजा शर्तों के उल्लंघन करने के आरोप में जमातियों को जेल जाना होगा, साथ ही सजा भी भुगतना होगा।

फाऊंडर की तलाश – भदोही जनपद में भी इन दिनों तबलीगी जमात के पहले फाऊंडर यांनि भदोही में इस जमात का बीजारोपण करने वाले सबसे पहले मददगार को लेकर ज्वलंत चर्चा चल रही है। इसी चर्चा ने सियासी गलियारे में भूचाल ला दिया है क्योंकि अधिकांश जनप्रतिनीधि मौन सुगबुगाहट तो कर रहे हैं लेकिन खुलकर बोलने से बच रहे हैं। मुख्यतः दबी जुबान से हाफिज फारूक बेग का नाम लिया जा रहा है, जिन्हें पूर्व विधायक ‘जाहिद बेग’ का ‘बड़का अब्बा’ बताया जा रहा है।
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क्या कहते हैं जाहिद बेग – ‘सशक्त समाज न्यूज’ ने पूर्व विधायक जाहिद बेग से इस क्षेत्रीय चर्चा पर प्रतिक्रिया लिया लेकिन वे इस जमाती बीजारोपण से अपने परिवार को बचाते नजर आये। उन्होंने मजबूती के साथ कहा कि यह चर्चा कुछ स्थानीय राजनेताओं की ऊपज है। हालाकि यह स्वीकार किया कि हाफिज फारूक बेग उनके बड़के अब्बा यांनि सरल शब्दों उनकी माँ की बहन के पति अर्थात उनके मौसा ही है, जिनका इंतकाल १५ वर्षों पूर्व हो चुका है। ऐसी स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुये उन्होंनें कहा कि ”हमारा परिवार सर्व समाज के पुश्तैनी सामाजिक-धार्मिक कार्यों में सहयोगी रहा है, रही बात फाऊंडर मुख्य की चर्चा पर तो यह पूर्ण रूप से राजनीति से प्रेरित है क्योंकि ११०% गारंटी है कि हमारे परिवार से किसी ने भदोही में तबलीगी जमात की स्थापना नहीं की थी और नाही वर्तमान में संरक्षण देने का कार्य कर रहा है।”
आगामी भागों में पढ़िये…‘भदोही’ में ‘गहरी पैठ’ जमा चुके ‘तबलीगी जमात’ के संस्थान, सबसे बड़े मददगार ‘कालिन व्यापारियों’ की भूमिका व दरबारी राजनेताओं की पृष्ठभूमि…



