कोरोना के कहर से जहां पूरा देश एक साथ लड़ रहा है, वहीं Indiabulls कंपनी ने लॉकडाउन में हजारों कर्मचारियों पर नौकरी छोड़ने का दबाव बना दिया है। यह मामला देश की आर्थिक राजधानी मुंबई का है। पीएम नरेन्द्र मोदी व राज्य के सीएम उद्धव ठाकरे ने लगातार कंपनियों से आग्रह किया है कि किसी को भी इस आपदा के क्षण में नौकरी से ना निकाला जाय बल्कि उनका सहयोग किया करें। फिर भी Indiabulls का यह कदम उक्त आग्रह को ठेंगा दिखाने जैसा प्रतित हो रहा है। फिलहाल करीबन 3 हजार कर्मचारी कंपनी के इस कदम से प्रभावित हो रहे हैं, जिसे लेकर कुछ ने सीएमओ से पीएमओ तक ट्वीट कर दिया है और रिप्लाई के इंतजार में हैं।
गौरतलब है कि Indiabulls Dhani ने उच्च पदस्थ मैनेजरों के माध्यम से कर्मचारियों को रिजाइन देने को कहा है। इतना ही नहीं बल्कि कर्मचारियों को धमकियां भी मिली है कि अगर आप रिजाइन नही डालोगे तो कंपनी खुद तुम्हे निकाल देगी और सेटलमेंट धनराशि भी नहीं देगी। कर्मचारियों की मानें तो यह धमकी देने वाले उनके एरिया मैनेजर और रीजनल मैनेजर हैं। हालांकि राइटिंग में कर्मचारियो को कुछ भी देने से मैनेजर व कंपनी से संबंधित विभाग कतरा रहा है। कर्मचारी बार-बार कंपनी के CO, HR, और हेड HR को ईमेल कर रहे हैं लेकिन वहां से भी किसी भी प्रकार का कोई जवाब नही मिल रहा है। ऐसे में 3 हजार से ज्यादा कर्मचारी इस लॉकडाउन में कहा जाएंगे, क्या करेंगे, उनके परिवार का क्या होगा..?

क्या कहते हैं कर्मचारी – कर्मचारियों का कहना है कि हम twitter, facebook, Instagram पर हर जगह पोस्ट करके मदत मांग रहे है लेकिन ऐसे वक्त में हमारा कोई साथ देने को तैयार नही है, ना ही किसी की हम पर नज़र पड़ रही है। ना सरकार ध्यान दे रही है, ना ही कोई समाजसेवी आगे बढ़कर आ रहा है।
मानसिक मंथन – कर्मचारी इस लॉकडाउन में जहां मानसिक रूप से विचलित हैं, वहीं मानसिक मंथन कर रहे हैं कि “कंपनी निकाल देती है तो हम कहा जाएंगे, ऐसी स्थिति में हमें इतने जल्दी किसी कंपनी में जॉब भी नहीं मिलेगा और हमारा परिवार कैसे चलेगा। अगर इस वजह से हम और हमारा परिवार बेसहारा हो गए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा कंपनी या सरकार..क्योंकि अगर सरकार ने कहा है कि 3 महीने तक कोई भी कंपनी किसी कर्मचारी को नही निकालेगी तो हमारी कंपनी विश्वासघात करके सरकार के साथ-साथ पीएम-सीएम के आग्रह को ठेंगा क्यों दिखा रही है।



