‘तबलीगी जमात’ की चर्चा जहां इन दिनों चहूओर है, वहीं अधिकांश लोग इससे जुड़े तथ्यों को जानना व पढ़ना चाहते हैं। इसी क्रम में ‘सशक्त समाज न्यूज’ नेटवर्क पर संकलित सनसनीखेज तथ्यों पर आधारित ‘तबलीगी जमात’ नामक धारावाहिक पाठकगणों हेतु प्रकाशित किया जा रहा है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय-राष्ट्रीय से शुभारंभित होकर ‘कर्मभूमि’ से ‘जन्मभूमि’ तक के नेटवर्क को समेंटने का प्रयास होगा। इस निष्पक्ष ‘धारावाहिक’ को ज्यादा से ज्यादा पाठकगणों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी आप पाठकगणों से ही अपेक्षित है..✍️
दुनिया भर में फैले कोरोना संक्रमण के मध्य में अचानक तबलीगी जमाती एक बार फिर सुर्खियों में हैं. दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में जमातें इस्लाम के प्रचार-प्रसार हेतु परिक्रमा करती रहती हैं. तमाम देशों से तबलीगी जमात के लोग भारत में भी आते हैं. एक मिडिया रिपोर्टस के मुताबिक ‘सऊदी अरब’ जहां से इस्लाम की शुरुआत हुई, वहीं पर ‘तबलीगी जमात’ पूरी तरह ‘बैन’ है. इसके अलावा ईरान में भी इन्हें इस्लाम के प्रचार-प्रसार करने की इजाजत नहीं है.
तबलीगी जमात की स्थापना – मौलाना इलियास कांधलवी ने 1927 में तबलीगी जमात का गठन किया था. बताया जाता है कि इस जमात में देवबंदी विचारधारा से प्रेरित और मुसलमानों में हनफी संप्रदाय के लोग ज्यादा सक्रिय हैं. इलियास कांधलवीी दिल्ली से सटे हरियाणा के मेवात में मुस्लिम समुदाय को इस्लाम की मजहबी शिक्षा देकर इसकी नींव मजबूत करना शुरू किये थे. इसके बाद से तबलीगी जमात की भूमिका तमाम देशों में काफी फल-फूल रही है, लेकिन सऊदी अरब और ईरान में तबलीगी जमात अपनी जगह नहीं बना पाई है.
कार्यशैली में विभिन्नता – सऊदी अरब में मस्जिदों की सारी जिम्मेदारियां सरकार के पास हैं. वहां पर मस्जिदों में किसी को ठहरने की इजाजत नहीं और न ही किसी तरह की कोई धार्मिक भीड़ इकट्ठा करने की है. जबकि, तबलीगी जमात के लोग मस्जिदों में जाकर ठहरते हैं और लोगों के बीच प्रचार-प्रचार करते हैं. इसी के चलते सऊदी अरब की हुकूमत ने तबलीगी जमात को अपने देश में बैन कर रखा है. इसके अलावा अरब का एक ये भी तर्क है कि यहां हम इस्लाम के केंद्र में ही हैं, ऐसे में कोई हमें क्या इस्लाम बताएगा.
प्रतिबंध का पत्र – सऊदी अरब ने तबलीगी जमात के अलावा भी कुछ दूसरे मुस्लिम समुदायों पर भी बैन कर रखा है. सार्वजनिक रूप से यहां न तो किसी को अपने धार्मिक कार्य करने की इजाजत है और न ही किसी तरह के कोई चंदा इकट्ठा करने की. हाल ही में सऊदी अरब ने तबलीगी जमात को प्रतिबंधित करने के लिए बकायदा लेटर भी जारी किया है. इस संदर्भ में भारत के एक स्थापित मीडिया समूह ने खबर प्रकाशित करने के साथ प्रतिबंध का पत्र भी उपलब्ध होने का दावा किया है.
ईरान में भी नो इंट्री – सऊदी अरब में जहां सलफी संप्रदाय की बहुलता है तो, वहीं ईरान शिया संप्रदाय बहुल है और सत्ता पर भी उनका कब्जा है. तबलीगी जमात और शिया संप्रदाय के बीच काफी वैचारिक मतभेद हैं. शिया संप्रदाय के धार्मिक क्रियाकलापों को तबलीगी जमात इस्लाम के खिलाफ बताता है. ऐसे ही तबलीगी जमात के कामकाज को भी शिया समुदाय के लोग सही नहीं मानते हैं. इसी के चलते ईरान में तबलीगी जमात की एंट्री पर प्रतिबंध है।
आगामी भागों में पढ़िये…भारत की राजधानी दिल्ली के ‘निज़ामुद्दीन’ से ‘भदोही’ तक ‘तबलीगी जमात’ की ‘गहरी’ पैठ, सबसे बड़े मददगार ‘कालिन व्यापारी’ की भूमिका व दरबारी राजनेताओं की पृष्ठभूमि…



