कल्याण (पूर्व) की सीट पर भाजपा विधायक ‘गणपत’ के किले में सेंध लगाने उतरे प्रत्याशी भी चुनावी प्रचार में दमदारी दिखा रहे हैं. जोकि आपस में ही आगे-पीछे चल रहे हैं. ऐसा भाजपा के कल्याण जिला सचिव का दावा है।

जगजाहिर है कि कल्याण (पूर्व) की चुनावी सीट पर ‘हिन्दी भाषी’ वोट की अहम् भूमिका है, जिनकी वोटिंग निर्णायक होती है और यह भी तय करती है कि आगामी विधायक का ताज किसके सिर पर होगा. भाजपा के ‘कल्याण जिला सचिव’ आर पी मिश्रा बताते हैं कि कल्याण (पूर्व) से श्रीमती सुलभा गणपत गायकवाड काफी आगे चल रही हैं. मुख्यतः पहला कारण है कि भाजपा व शिवसेना (शिंदेगुट) द्वारा वो अधिकृत प्रत्याशी हैं, दूसरा भाजपा विधायक गणपत गायकवाड बतौर सीटिंग विधायक विकास कार्य करने में कभी पीछे नहीं हटे हैं. रही चुनाव की बात तो यह पार्टी के नाते नहीं बोल रहा हूँ बल्कि स्थानीय क्षेत्र में चुनावी प्रचार के दौरान यह समझ में आ रहा है. इस सीट पर भाजपा व शिवसेना (शिंदेगुट) द्वारा एकजुट लड़ने से जहां पार्टी इस सीट को जीतनें में सक्षम है, वहीं दूसरी तरफ कल्याण की यह सीट विधायक गणपत गायकवाड परिवार के लिए परंपरागत है, जिसे निर्दलीय जीतकर भी वो परचम लहराने में सफल रहे थे. इससे उनकी लोकप्रियता का अंदाजा आप लोग लगा सकते हैं।
हिन्दी भाषी कुछ मतदाता इधर-उधर, सबसे ज्यादा सुलभा व भाजपा के साथ..
आर पी मिश्रा चुनावी विश्लेषण में यह भी कहते हैं कि रही बात हिन्दी भाषी वोट की, तो भले ही कुछ हिन्दी भाषी मतदाता अपने करीबी हिन्दी भाषी नेताओं की वजह से इधर-उधर भटक रहे हों, फिर भी स्पष्ट दिख रहा है कि सबसे ज्यादा हिन्दी भाषी मतदाताओं का रूझान प्रत्याशी श्रीमती सुलभा गणपत गायकवाड़ व भाजपा की ओर ही है।



