सरकार भले ही किसानों की आय दुगुना करने की बात करती है लेकिन स्थानीय स्तर के जिम्मेदारों द्वारा जारी लापरवाही और भ्रष्टाचार से सरकार के मंशा पर पानी फिर रहा है। यकीन ना हो तो भदोही जनपद क्षेत्र का दौरा कर लीजिए, जहां सिंचाई विभाग में बैठे ‘धृतराष्ट्रों’ को बंद पड़े नलकूपों के बाद भी फसल लहलहाती नजर आ रही है. पिछले कुछ वर्षों से यही आलम है लेकिन अब जनतांत्रिक आवाज उठने लगी है. जिस मामले का हम जीक्र कर रहे हैं यह तो सिर्फ प्रमाण है, जिसकी चीख भी शायद शासनिक अधिकारी भी अब देख और सुन लें…✍️
एक ऐसा ही लापरवाही का नजारा भदोही जिले के डीघ ब्लाक अन्तर्गत बेरासपुर गांव में देखने को मिल रहा है, जहां राजकीय नलकूप होने के बावजूद भी किसान खेती के लिए तरस रहें. यहां नलकूप की जगह निजी पम्पिंगसेट से पानी काफी महंगी कीमत पर पानी लाकर किसान खेतों की सिंचाई करने पर विवश है। कुछ किसान तो अपनी खेतों की बुआई नलकूप के पानी के सहारे किया था लेकिन नलकूप से सही समय पर पानी पाना अब बड़ा ही मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बेरासपुर में स्थित राजकीय नलकूप (418 बीजी) पर तैनात नलकूप चालक कभी भी गांव में नही आता है और नलकूप की चाभी बगल गांव के निवासी को दे दिया है। जिस व्यक्ति के पास चाभी है, वह व्यक्ति मनमानी करता है। और तो और…उन्ही को पहले पानी देता है जो उसे अधिक पैसा देता है। कुछ लोगो को तो नलकूप चालक द्वारा नियुक्त व्यक्ति पानी न देने की धमकी देता है। और यह सब केवल नलकूप चालक की लापरवाही और मिलीभगत से हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि नलकूप के पास खुला तार लटका है, जो हमेशा किसी बडी घटना को न्यौता दे रहा है। नलकूप की नालियां एकदम टूट गई है, जिससे बहुत किसानों के फसलों की सिंचाई नही हो पा रही है। गांव के उमाशंकर यादव ने बताया कि जब नलकूप चलता है तो नाली टूटी होने की वजह से पानी उनके गेहूं के खेत में भर जाता है, जिससे गेहूं में खाद न देने से उसकी हालत खराब हो गई है। यदि नाली सही होती तो पानी अपने नियत जगह पर जाता और गेहू की फसल बर्बाद न होती।



