अनारक्षित सीट से प्रधानी का दंभ भर रहे ब्राम्हण-ठाकूर अत्यधिक मुसीबत में फंसे नजर आ रहे हैं. कहीं सीट आरक्षित हुई तो, कहीं लेडिज सीट पहली सूची में समाविष्ट हुई है. लेडिज सीट पर भावी प्रधान अपनी पत्नी की तस्वीर के सहारे नईआ पार करने की सोच रहे थे लेकिन उनके प्रचार-प्रसार के बैनर को कुछ मतदाताओं नकार दिया, तो कुछ नसीहत दे रहे हैं कि भौजी अईहिंन मैदान में तब बनी बात..✍️
जगजाहिर है यूपी में पंचायत चुनाव को लेकर कई महीनों से शासनिक तैयारियां चल रही हैं, जिसके तहत अब ग्राम पंचायत की सीट आरक्षित/अनारक्षित होनें की प्रथम सूची भी जारी हो गई. भले ही उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के लिए आरक्षण की व्यवस्था है लेकिन उन्हें पुरूष के हाथों कठपुतली बनकर रहना पड़ जाता है. ज्यादा से ज्यादा बड़ी मेहनत हुई तो महिला प्रत्याशी की तस्वीर पोस्टर पर लगाकर भावी प्रधान के दंभधारी खुद निकल पड़ते हैं वोट बटोरने और चुनाव जीतकर ‘प्रधान पति’ बनकर टहलते है। इतना ही नहीं बल्कि कुछ ऐसे स्वयंभू प्रधान की भूमिका वाले जमकर भ्रष्टाचार को अंजाम देते हैं, जोकि महिला प्रधान की छवि को तार-तार करती है लेकिन वो बिचारी घूंघट में और यहां भ्रष्टाचार की वैतरणी पार हो जाती रही है।
जांच की आंच में लाज – यूपी के कई गांवों में पिछले पंचवर्षीय के दौरान हुए भ्रष्टाचार को लेकर जांच की आंच शासनिक विभाग ही नहीं बल्कि हाईकोर्ट की फटकार तक पहुंची लेकिन चूंकि महिला ग्राम प्रधान होने के कारण लोक-लिहाज का रोड़ा फंस गया. ऐसे में भ्रष्टाचार के मामलों में कोई कठोर कार्यवाही नहीं हो सकी। अंतत: प्रधान पतियों पर सरकार ने शिकंजा कसते हुए पिछले पंचवर्षीय में ही महिला ग्राम प्रधान की उपस्थिति में खुली बैठक की प्रथा शुरू की, जिसके तहत कुछ दशा तो सुधरी. फिर भी ग्राम विकास धनराशि पर गिद्ध की तरह नजर बैठाए अधिकांश प्रधान पतियों ने झोलझाल नहीं छोड़ा।
भौजी अईहिंन मैदान में, तब बनी बात….पिछले दो दिनों में कई गांवों के भावी प्रधान लगातार सपनेदार खुशियां मना रहेे थे. भदोही में कुछ लेडिज सीटों पर अपने पुराने पोस्टर-बैनर के सहारे वोट मांगने निकले. जहां सोशल मीडिया पर कुछ युवा मतदाताओं ने उन्हें दो टूक जवाब दे दिया कि महिला सीट है और जब भौजी चुनावी मैदान में आएगी तब समर्थन वगैरह की बात होगी और आप प्रत्याशी बनकर आना चाहते हैं तो साड़ी पहनकर आइए।