कोरोना संकट में जान बचाकर जन्मभूमि भागे प्रवासी लगातार कर्मभूमि लौट रहे हैं, जिसके तहत करीबन २५ लाख लोगों के लौटनें के आकड़े रेलवे से समक्ष आए हैं. अधिकांशतः संख्या इनमें श्रमिकों है, जिनका यहां मायानगरी-मुंबई लौटनें पर बंद पड़ी कंपनियों ने टेंशन बढ़ा दिया है. इसी कारणवश आधी पगार पर भी कर्मभूमि लौटे लोग मजबूरन डियुटी बजाने को तैयार हैं लेकिन पुन: सभी का एडजस्ट हो पाना फिलहाल किसी चैलेंज से कम नहीं दिख रहा है।
गौरतलब है कि मध्य और पश्चिम रेलवे के अनुसार जून से अगस्त तक के तीन महीनों में लगभग २५ लाख श्रमिक, विशेष ट्रेनों से मुंबई लौट आए हैं। समझा जाता है कि सबसे अधिक १६ लाख यात्री मध्य रेलवे से आए हैं। मध्य रेलवे ने सीएसएमटी, एलटीटी, ठाणे, कल्याण से उत्तर और दक्षिण के लिए १५ विशेष ट्रेनें जारी रखी थीं. गोरखपुर से लोकमान्य तिलक टर्मिनस, दरभंगा से एलटीटी, गोरखपुर से एलटीटी, वाराणसी से सीएसएमटी, भुवनेश्वर से सीएसएमटी, हैदराबाद से सीएसएमटी, बैंगलुरु से सीएसएमटी और अन्य क्षेत्रों की ट्रेनें प्रतिदिन मुंबई पहुंच रही हैं। पश्चिम रेलवे पर, जोधपुर, अमृतसर, नई दिल्ली, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर आदि से मुंबई सेंट्रल, बांद्रा टर्मिनस तक ट्रेनें आती हैं। करीब ९ लाख ४७ हजार ५६० यात्री कर्मभूमि पहुंचे हैं।
छोटी-मोटी कंपनियां कर चुकी हैं पैकअप– कोरोना संकट में फंसी छोटी-छोटी कंपनियां करीबन ठप्प पड़ी हैं क्योंकि पिछले कुछ महीनों से लाॅकडाऊन में बिना श्रमिकों के जहां प्रोडक्शन नहीं हो पाया, वहीं पुराने माल की भी बिक्री में झटका लग गया. ऐसी स्थिति में आॅफिसियल कार्यरत लोगों को आधा-अधूरा वेतन और किराए के कार्यालयों व प्रोडक्शन हाऊस ने कमर तोड़ दी. कुछ कंपनी मालिक अभी अनलाॅक के दौरान पुन: परिस्थितियों से उबरने हेतु टिके हैं तो इसी में से अधिकांशतः ने परिस्थितियों में खुद को फंसते देख प्रोडक्शन – कारोबार का दायरा समेट लिया है या पैकअप भी कर लिए हैं।
बड़ी-बड़ी कंपनियों में भी छंटनी – कोरोना संकट में विभिन्न प्रोडक्ट बनानी वाली कंपनियों में जहां छंटनी हुई, वहीं कई सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों ने हालात का हवाला देकर स्थिति सामान्य होने तक व्यापार ठप्प कर दिया है. खाद्य सामग्री की कुछ बड़ी-छोटी कंपनियों ने बाजार में भले ही अपना प्रोडक्ट बेचा लेकिन उन्होंने भी छंटनी में आधा-चौथाई वेतन देकर प्रोडक्शन के आलावां सिर्फ आॅफियल व कुछ सेल्स विभाग वालों को रोके रखा है।
कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए अचानक देश में हुए लॉकडाउन ने लाखों लोगों की नौकरी खा ली। हजारों लोगो ने अपने गांव जाने का मन बनाया, कुछ श्रमिक बिचारे मजबूरन ट्रक-टैंम्पों या पैदल ही लौट गए. अब गांव में बेरोजगारी व भूखमरी की समस्या व वहां फैलते कोरोना संक्रमण के मद्देनजर पुन: कर्मभूमि लौट रहे हैं. अधिकांशतः संख्या इनमें श्रमिकों है. यहां बंद पड़ी कंपनियों ने टेंशन बढ़ा दिया है. इसी कारणवश आधी पगार पर मजबूरन डियुटी बजाने को तैयार हैं लेकिन पुन: सभी का एडजस्ट हो पाना फिलहाल किसी चैलेंज से कम नहीं दिख रहा है।



