8 वर्षों से ‘गैर जमानती’ वारंट – ना हुई गिरफ्तारी, ना हुई कुर्की, ऐसा रूतबा ‘ब्लाॅक प्रमुख’ का.!

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8 वर्षों से किसी के नाम ‘गैर जमानती वारंट’ जारी हो लेकिन ना उसकी गिरफ्तारी हो और ना कुर्की हो…बल्कि वह बतौर ब्लाॅक प्रमुख शासनिक-प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मंचो पर भी नज़र आए. इतना ही नहीं 8 वर्षों बाद भी खुलासा तब हो, जब ब्लाॅक प्रमुख खुद सुविधानुसार न्यायालय में सरेंडर करे. शायद यह पढ़कर आप भौचक्के रह जाएं.. यूपी के भदोही जिले से ऐसे ही रूतबेदार ब्लाॅक प्रमुख के संदर्भ में एक राष्ट्रीय अखबार ने खुलासा किया है, जिस खबर पर यकींन करें तो कई सनसनीखेज सवाल आपके भी जहंन में शासन-प्रशासन की भूमिका को लेकर उठनें लाजिमी हैं। 

गौरतलब है कि पुलिस शांति-व्यवस्था कायम रखने के लिए अपराधियों पर नजर गड़ाए बैठी रहती है और प्रतिदन वांछित वारंटियों को भी न्यायालय तक पहुंचाने से पीछे नहीं हटती है. खैर..इसी दौर में एक राष्ट्रीय अखबार ने भदोही जनपद के तथाकथित ब्लाॅक प्रमुख के मामले को लेकर खबर प्रकाशित है. खुलासेदार खबर में सवाल उठाते हुए लिखा है कि ‘‘वांछित और वारंटी पर पुलिस निगाह गड़ाए रहती है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि ज्ञानपुर के ब्लाक प्रमुख मनीष मिश्र पर आठ वर्ष से गैर जमानती वारंट जारी था लेकिन पुलिस तामील कराने की हिम्मत नहीं जुटा रही थी। वह एसपी से लेकर उच्चाधिकारियों तक के दरबार में पहुंचते रहे लेकिन किसी की नजर नहीं पड़ी। बताया जा रहा है कि वह कोर्ट में हाजिर न हुए होते तो इसकी भनक भी न लगती। हालांकि जमानत खारिज होने के बाद वह न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिए गए। कोरोना पॉजिटिव होने से उन्हें एल-1 अस्पताल में रखा गया है।”

गबन में भी वारंटधारी – विकास खंड डीघ में तत्कालीन लिपिक द्वारा गबन के मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। वर्ष 2015 से इस मामले में भी गैर जमानती वारंट जारी है। पुलिस इस वारंट को भी तामील नहीं करा पाई। पुलिस की इस तरह की कार्यशैली कानून को कटघरे में खड़ा कर देती है।

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