पुलवामा में शहीद हुए जौनपुरिया सपूत जिलाजीत यादव का पार्थिव शरीर जब शुक्रवार को उनके पैतृक गांव धौरहरा इजरी पहुंचा. वहां अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में लोग उपस्थित थे. जिला प्रशासन ने जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया, वहीं परिवार के छलकते आंसूओं को पोछते हुए अंतिम यात्रा तक गमगीन स्थानीय सांसद उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि शहीद जिलाजीत को अंतिम विदाई देने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ जिले के डीएम, पुलिस अधीक्षक समेत तमाम अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और नम आंखों से शहीद जिलाजीत को श्रद्धांजलि दी. शहीद जिलाजीत की पत्नी और मां ताबूत से लिपटकर रो पड़ीं. परिवार के सभी लोगों के साथ शहीद जिलाजीत के मासूम बच्चे ने पिता के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित किए. जिस बेटे को अभी श्रद्धांजलि का मतलब भी नहीं पता, उसे ऐसा करते देख वहां मौजूद हर शख्स की आंख में आंसू आ गए. इस दौरान गमगीन होकर सांसद बीपी सरोज व प्रभारी मंत्री उपेन्द्र तिवारी निरंतर बने हुए थे.
संवेदना लेकर पहुंचे थे सांसद-मंत्री – परिवार की इकलौती संतान जिलाजीत की शहादत पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उनके शौर्य और वीरता को नमन करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि संदेश दिया. जिसे दुहराते हुए सांसद बीपी सरोज ने शहीद के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और जिले की एक सड़क का नाम शहीद जिलाजीत के नाम पर समयाानुसार पूर्ण करने भी घोषणा की. इसके साथ ही निरंतर परिवार से जुड़े रहकर उनके लिए समर्पित रहने की बात कही. कहा कि गमगीन हूँ लेकिन सौभाग्य है कि जिलाजीत जैसे वीर सपूतों के जन्मभूमि की मिट्टी से सांसद हूँ, जिन्होंने भारत माता की रक्षा में शौर्य-पराक्रम की जंग लड़ी।
जिलाजीत अमर रहें – भारत माता की जय और जिलाजीत यादव अमर रहें…जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंजता अंत्येष्टि स्थल तक गुंजमान रहा। उनका अंतिम संस्कार गोमती नदी के तट पर स्थित रामघाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया गया. बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकवादियों से मुठभेड़ में बुधवार की तड़के सुबह मराज़ीपोरा में एक बाग में आतंकी छिपे होने की सूचना मिलते ही सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया और तलाशी अभियान चलाया. खुद को घिरा देख आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी. सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई की. इस दौरान जिलाजीत शहीद हो गए.




