पीएम के संसदीय क्षेत्र में खुलेआम बदमाशों की गोलियों से छलनी अभिषेक सिंह भले ही मौत की नींद सो गया लेकिन पुलिस हिस्ट्री ज्ञान मीडिया में बांटकर अपनी खामियां खुद बीच चौराहे पर बांट रही है. ऐसे में पुलिस के हिस्ट्री ज्ञान व अभिषेक की सक्रियता के बीच कोई सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि कानून-व्यवस्था को चैलेंज करके फरार हत्यारे बदमाशों तक पुलिस पहुंच पाएगी या नहीं.?
गौरतलब है कि दिन दहाड़े पीएम के संसदीय क्षेत्र में तड़की गोलियों की गूंज पूरे देश में दिखाई पड़ी, जिसकी सीसीटीवी फूटेज मीडिया के सुर्खियों में रही. अब पुलिस पुलिस ने मीडिया में हिस्ट्री ज्ञान बांट दिया है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वाराणसी के चौकाघाट में बदमाशों की गोली का शिकार हुआ मकबूल आलम रोड का हिस्ट्रीशीटर अभिषेक सिंह प्रिंस अवैध असलहे और कारतूस का धंधा तो करता था, जो प्रतिबंधित बोर की 9 एमएम की पिस्टल साथ रखने का शौकीन भी था। अभिषेक वर्ष 2012 से अवैध असलहे और कारतूस लाकर वाराणसी सहित पूर्वांचल के जिलों में बेचने के लिए जरायम जगत के गिरोहों के बीच चर्चित था।अभिषेक ने बनारस, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर और बिहार के भभुआ, सासाराम, जहानाबाद और मुंगेर के नई उम्र के लड़कों की अच्छी खासी टीम खड़ी कर रखी थी। ये लड़के मुंगेर निर्मित देसी पिस्टल और रिवाल्वर 15 से 17 हजार रुपये में खरीद कर बस या ट्रेन से बनारस लाते थे। इसके बाद अभिषेक के इशारे पर इन्हें बनारस और आसपास के जिलों में 30 से 40 हजार रुपये में बेंचा जाता था। बात बिगड़ने पर अभिषेक खुद को अधिवक्ता बताकर पुलिस पर धौंस जमाता और अपने गिरोह के लड़कों का बचाव करता था। अभिषेक के खिलाफ रामनगर थाने में पहली बार वर्ष 2013 में आर्म्स एक्ट और गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके बाद उसके खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट, हत्या का प्रयास और हत्या सहित अन्य आरोपों में रामनगर और कैंट थाने में मुकदमे दर्ज होते रहे। अभिषेक का जेल आना-जाना भी लगा ही रहा।
भले ही उधर, अभिषेक की हत्या की सूचना पाकर विधवा बनी उसकी पत्नी विलाप कर रही और मां-बाप का रो-रोकर बुरा हाल है लेकिन यूपी पुलिस फेल हुई का कानून व्यवस्था की खामियां छिपाने में जुटी है. पुलिस के हिस्ट्री ज्ञान को लेकर ही अब सवाल उठते नजर आ रहे हैं कि यदि वह हिस्ट्रीशीटर अपराधी था और अवैध कार्यों को अंजाम देने में निरंतर सक्रिय था तो, योगीराज में पुलिस ने उसे जिलाबदर या सलाखों में पहुंचाने की कार्यवाही क्यों नहीं किया. फिलहाल पीएम के संसदीय क्षेत्र में भी जिंदगी-मौत के खेल से बिगड़ी कानून व्यवस्था की चर्चा चहूंओर है।
इधर अब बड़े-बड़े अखबार के बिल्लाधारी लोकतंत्र के प्रहरी पत्रकार खुलासा कर रहे हैं कि कोरोना संक्रमण के कारण लॉकडाउन हुआ और उससे पहले तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी की सख्ती के चलते जिले में गांजा की बिक्री बंद सी हो गई तो अभिषेक ने तस्करों से संपर्क कर चंदौली को गांजा बिक्री का अड्डा बनाया और बनारस सहित आसपास के अन्य जिलों में सप्लाई कराने लगा।



