यूपी विधानसभा में आपराधिक मामलों की फेहरिस्त लेकर 143 ऐसे विधायक विराजमान हैं, जिन पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं. इसमें 101 विधायकों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं, जिसमें हत्या, हत्या के प्रयास, छेड़छाड़ और धोखाधड़ी के मामले शामिल हैं. उपयुक्त आकड़े में सभी दलों के जोड़ के समक्ष भाजपा विधायकों का ‘चौगुना’ शुमार है, जिसके कारण भाजपाई यह पढ़कर राजनीति बनाम आपराधिक छवि के मुद्दे पर मौन होने को मजबूर जाते हैं..✍️
गौरतलब है कि एक राष्ट्रीय अखबार सहित अन्य मीडिया समूहों ने फरवरी में एडीआर के हवाले से एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें यूपी विधानसभा में बीजेपी के 83, समाजवादी पार्टी के 11, बसपा के 4 और कांग्रेस के 1 विधायक के अलावा 3 अन्य विधायकों पर गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज होने का तथ्य स्पष्ट है। एडीआर यूपी के संयोजक संजय सिंह ने बतलाया था कि ‘न्यायालय के निर्देश पर पूर्व में भी आपराधिक छवि के उम्मीदवारों को प्रतिष्ठित अखबारों में विज्ञापन छापने, राजनैतिक दलों की वेबसाइट पर अपलोड कराने जैसे निर्देश दिए थे। इसकी निगरानी के लिए जिला स्तर पर जिलाधिकारियों को जिम्मेदारी भी दी गई थी लेकिन अधिकतर उम्मीदवारों और राजनैतिक दलों ने इसका पालन ही नहीं किया। मौजूदा विधानसभा में 8 विधायक ऐसे हैं, जिन पर हत्या का मुकदमा चल रहा है, जबकि 34 विधायकों पर हत्या के प्रयास का मुकदमा चल रहा है। एक विधायक महिला से छेड़-छाड़ के आरोपी हैं और 58 विधायकों के खिलाफ अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है।’
मंत्रियों के दामन पर भी है दाग…राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही राजनीति में आपराधिक छवि वालों से दूर रहनें का प्रयास करते हैं और विपक्षी दलों या निर्दलीय विधायकों सत्त्ता का सुशासन पढ़ानें में हों लेकिन एडीआर की रिपोर्ट में यह भी दावा था कि ‘योगी सरकार में 20 मंत्रियों के दामन पर दाग हैं। इसमें सबसे ऊपर हैं प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जिन पर हत्या, धोखाधड़ी और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने समेत कुल 11 आपराधिक मामले दर्ज हैं। दूसरे नंबर पर इलाहाबाद से चुनाव जीते कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी हैं, जिन पर धोखाधड़ी, आर्थिक अपराध व डकैती के 7 मुकदमें दर्ज हैं।



