बसपा सरकार में भी भदोही के साथ पुर्वांचल की सीटों पर सपा विधायक विजय मिश्रा के कामकाजी रसूख का असर बढ़ता ही जा रहा था, जिसके कारण ठीकाने लगाने की तैयारी शुरू हुई थी. बसपा सुप्रीमों मायावती के स्वाभिमान वाली सीटों पर भी चुनाव-उप चुनाव में सपा के अन्य प्रत्याशियों को जिताने में जनाधार की तूती गूंजना ही इस ज्ञानपुर विधायक के लिए काल साबित हुआ था. ऐसे में कुछ स्थानीय ब्राम्हण विधायक-मंत्रियों को चाणक्यवादी राजनीति का मौका बसपा में मिला लेकिन वे सत्तादंभ में नीजी दुश्मनी का बदला लेने के चक्कर में मतदाताओं की नजर से उतर गए। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण समक्ष रहा कि सलाखों में कैद विधायक विजय मिश्रा जहां डबल मार्जिन करीबन 40 हजार वोट से जिते, वहीं पुर्वांचल की जनता ने बसपा का सूपड़ा ही साफ कर दिया।
जगजाहिर है कि चुनाव के दौरान विधायक विजय मिश्रा की पत्नी रामलली और उनकी बेटी ने बिना कोई वादा किए घर-घर वोट मांगा था। चुनाव जीतने के बाद विजय मिश्रा जेल से बाहर आ गए। विजय मिश्रा मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और रामगोपाल यादव के करीबी थे, जिसका फायदा उठाते हुए इन्होनें अपने विरोधियों से भिड़ंत के बजाय सपा सरकार में पुर्वांचल के कई विधानसभा क्षेत्र में पूर्व से जर्जर कई सड़को पर काम करवाने हेतु सरकार से करोड़ों पैकेज की योजना चलवा दी। विजय मिश्रा की राजनीति स्टाईल कुछ अलग ही रही है, जो रसूखदारों के इशारों पर काम न करके खुद फैसला लेते हैं। बड़े प्रोजेक्ट पर ज्यादा काम न करके बल्कि छोटे-छोटे प्रोजेक्ट से ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी स्टाईल काम करते हुए जनता को अपने पक्ष में कर लेते हैं। ज्ञानपुर विधानसभा क्षेत्र की सूरत बदलने में अहम भूमिका निभाते हुए सपा सरकार में जो विकास काम किया था, वह अनवरत जारी है लेकिन सपा सरकार के बाद मानिए कि सियासत की जोड़-तोड़ में ज्ञानपुर विधान सभा क्षेत्र के स्पेशल पैकेज विकास का पहिया थम गया है. भदोही व औराई में सत्तारूढ़ कुछ बड़ी योजनाएं मिली लेकिन भ्रष्टाचार से गुजरती हुई सिर्फ ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित हुई।
यह था मुख्य विकास – 2012 से 2017 के दौरान सिर्फ ज्ञानपुर विधान सभा क्षेत्र की बात करें तो करीबन 261 किलोमीटर की सड़क स्पेशल पैकेज से बनवाने और मरम्मत करवाने के आकड़े समक्ष आए थे. जिसमें से कई हाईटेक सड़के अभी भी चमचमा रही हैं। 16858 लोगों को समाजवादी पेंशन योजना का लाभ व 73 से ज्यादा लोहिया ग्राम चयन किया गया था। लोहिया ग्राम के तहत पिछड़े वर्ग ही नहीं बल्कि बिना जातिय भेदभाव गरीब ब्राम्हणों को भी पक्का मकान, चापाकल, सोलर लाइट नसीब हुआ। आश्रम पद्वति विद्यालय का निर्माण काार्य भी शुरू हुआ था, जोकि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया और इसकी जांच करवाकर कार्य पूर्ण करने के लिए मौन शासनिक अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ वर्तमान सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ दरबार तक भी कुछ महीनों पूर्व पत्र जमा करके विधायक ने जनता की आवाज बुलंद किया था। चापाकल हो या सोलर लाईट या बिजली की व्यवस्था कई मुद्दों पर जनता काम देखकर अटूट जुड़ी है।
सपा के बाॅय-बाॅय में, जनता का हाॅय-हाॅय – सपा से हैट्रिक विधायकी करने वाले विधायक विजय मिश्रा पारिवारिक व राजनीतिक सहित विभिन्न आपराधिक मुकदमों में जूझते रहे हैं, जिससे विकासप्रेमी जनता इत्तेफाक नहीं रखती. फिर भी तत्कालीन विपक्ष में बैठी भाजपा व कांग्रेस की बुलंद आवाजों ने आपराधिक मुकदमें झेल रहे नेताओं को सपा से बाहर का रास्ता दिखवा दिया. यह सपा का नया दौर अखिलेशवाद का पार्टी वर्चस्व था. ऐसे में सपा के अंतर्कलह में 2017 में कई पुराने नेताओं के साथ विजय मिश्रा का भी टिकट कट गया. सपा द्वारा विजय मिश्रा को बाॅय-बाॅय के बाद पुर्वांचली जनता ने जमकर हाॅय-हाॅय कर दिया। इसके बाद निषाद पार्टी के सहारे आए विजय मिश्रा को मोदी लहर में फिर से हैट्रिकपार 20 हजार से ज्यादा जोरदार वोटों से ज्ञाानपुर की जनता ने जिताया।
कोई राष्ट्रवाद व धर्मवाद पर भाजपा के समर्थन में तो, कोई भाजपा में बैठ फिरकापरस्त-स्वार्थवादी.!!सपा द्वारा आखिरी क्षण में किए विश्वासघात उपरांत ज्ञानपुर सीट पर निषाद पार्टी से उतरे विजय मिश्रा भले ही मोदी लहर में भाजपाई प्रत्याशी का टक्कर झेल रहे थे लेकिन भदोही व औराई सीट पर सपा-बसपा प्रत्याशियों के खिलाफ मोर्चा खोलकर भाजपा प्रत्याशियों का समर्थन किया. मुख्यतः इससे सपा को वजूद एहसास करवा दिया और राष्ट्रवाद व धर्मवाद के लिए भाजपा समर्थन का फर्ज भी निभा लिया. उसके बाद से राज्य सभा हो या विधान सभा या फिर भाजपा की कोई योजना सदैव समर्थन में रहे. क्षेत्रीय जनता यहां तक अनौपचारिक बताती है कि पिछले लोकसभा चुनाव में भी जब भाजपा प्रत्याशी रमेश बिंद के खिलाफ एक भाजपाई विधायक व कुछ पदाधिकारी स्वार्थवाद व ब्राम्हणवाद मोह में सपा-बसपा गठबंधन प्रत्याशी रंगनाथ मिश्रा के आंतरिक समर्थन में जुटे थे, उसी दौरान पूर्व मंत्री वर्तमान भाजपाई औराई विधायक दीनानाथ भास्कर की उपस्थिति में हजारों के जनसैलाब के समक्ष खुलेआमं भाजपा प्रत्याशी को जिताने की ललकार इसी ज्ञानपुर विधायक ने लगाया था। फिलहाल रमेश बिंद सांसद हैं, जो ज्ञानपुर से बंपर वोटों से आगे बढ़े और भदोही में गठबंधन प्रत्याशी से पिछड़ते हुए औराई में प्लस होते जीत गए।
दिग्गज बसपाइयों’ का ‘भाजपाई मोहरा‘, सरकार ‘समर्थकों’ पर ही ‘अक्रामक’ – फिलहाल भदोही जनपद की सियासत में जनता के नकारे हुए दिग्गज बसपाई नेताओं के इशारे एक भाजपाई विधायक ही स्वार्थवाद में मोहरा बनाकर अक्रामक हो चला है, जो मोदी लहर में भी बड़ी मुश्किल से चौतरफा राष्ट्रवाद-धर्मवाद व ब्राम्हणवाद के समर्थन के बाद भी चंद वोटों से जीता था। भाजपा सरकार के समर्थकों पर अक्रामक होने का मतलब यह नहीं है कि इस विधायक के दामन में दाग नहीं है बल्कि नीजी स्वार्थ में सियासी जमीन तलाश की जा रही है। सत्तादल में बैठकर हत्या, भ्रष्टाचार सहित कई जघन्य मामलों की फाइलें खुद की बंद करवाकर अक्रामकता जैसे-जैसे उक्त विधायक बढ़ा रहा है, उससे आक्रोशित जनता का मोहभंग भाजपा से हो रहा है। भाजपाई पदाधिकारी भी विगत् महीनें बसपाइयों के इशारे पर नाचने वाली इस टोलीदार विधायक गुट की शिकायत भाजपा संगठन में उच्च स्तर पर किए थे, उसमें सेे एक वायरल शिकायती पत्र भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध था।
(यह लेख क्षेत्रीय विकास कार्य, पार्टी जनाधार व नेताओं की कार्यशैली के दामन को भेंदते हुए वर्तमान सरकार के हितार्थ है. अधिकांश नेताओं का दामन अपराधिक मुकदमों के इर्द-गिर्द है, जोकि जांच व न्यायालय का विषय है. सत्तादल में बैठ जब किसी जनप्रतिनिधि-नेता द्वारा स्वयं के द्वारा किए भ्रष्टाचार व जनता शोषण के अपराध की फाइलें जिला शासनिक-प्रशासनिक अधिकारियों से साठगांठ करके जांच में दबवाई जा रही हो और विपक्षी दल छोड़िए बल्कि समर्थन देने वाली पार्टी व नेता पर सत्तापार्टी के नाम पर अक्रामकता दिखाई जा रही हो तो, ऐसे में सत्तादल व सरकार के प्रति समर्थक जनता में भी द्वैष भावना देखकर भय का माहौल जन्म लेता है…)

सियासत(01) बसपा का सूपड़ा साफ करवाने वाले नेता, अब भाजपा के खिलाफ ही रच दिए हैं कुचक्र.!


