भारतीय परंपरा में भाई बहन के प्रेम के प्रतीक त्यौहार रक्षाबंधन को खासा महत्व दिया गया है। रेशमी धागे के बंधन को भाई की कलाई पर बांधकर जहाँ बहन अपने भाई के दीर्घायु होने की कामना करती है, वहीं भाई, बहन से रक्षा बंधवाकर उसकी रक्षा का भार अपने कंधों पर ले लेता है। सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला यह त्यौहार इस वर्ष सावन माह के आखिरी सोमवार यांनि की 3 अगस्त को मनाया जाएगा।
विभिन्न संयोग के मुताबिक भाई-बहन का पवित्र पर्व रक्षाबंधन इस बार बहुत खास होनेवाला है क्योंकि इस साल रक्षाबंधन ना सिर्फ सावन माह के आखिरी सोमवार को मनाया जानेवाला है बल्कि इस वर्ष इस त्यौहार पर सर्वाथ सिद्धि और दीर्घायु आयुष्मान का शुभ संयोग भी बन रहा हैं। रक्षाबंधन पर ऐसा शुभ संयोग 29 साल बाद आया है। इस बार यह त्यौहार इसलिए भी खास है क्योंकि इस वर्ष इस त्यौहार पर भद्रा और ग्रहण का साया नहीं पड़ रहा हैं तो आइए आज हम आपको रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त के बारे में बताते हैं।
राखी बांधने का मुहूर्त— 09:27:30 से 21:11:21 तक, रक्षा बंधन अपराह्न मुहूर्त-13:45:16 से 16:23:16 तक, रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त— 19:01:15 से 21:11:21 तक, मुहूर्त की अवधि— 11 घंटे 43 मिनट।
रक्षाबंधन का त्यौहार कैसे मनाया जाए यह तो व्यक्तिगत रूप से प्रत्येक बहन पर निर्भर करता है लेकिन अधिक लाभ के लिए ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक मनाएं, जिससे ईश्वर की असीम अनुकंपा भाई-बहन पर बरसे। राखी की थाली में रेशमी वस्त्र, केसर, सरसों, चावल, चंदन और कलावा रखकर भगवान की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद राखी शिव की प्रतिमा को अर्पित करें। भगवान शिव को अर्पित किया गया धागा या राखी भाइयों की कलाई पर बांधे। रक्षा-सूत्र या राखी बांधते हुए निम्न मंत्र पढ़ा जाता है, जिसे पढ़कर पुरोहित भी यजमानों को रक्षा-सूत्र बांधते हैं…ॐ येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।



