उत्तर प्रदेश में पारदर्शी व सुचारू कार्यवाही हेतु मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही ‘जन सुनवाई’ पोर्टल को प्रमुखता देते हों लेकिन उनके ही ‘जांच आदेश’ पत्र पर पुलिस की ‘आख्या रिपोर्ट’ पढ़कर शायद सिर चकरा उठे। हम हवा-हवाई नहीं लिख रहे हैं बल्कि ऐसा चौकानें वाला सनसनीखेज दावा ‘परिवर्तन फांउडेशन’ नामक एक संस्था ने किया है।
गौरतलब है कि फतेहपुर जिले से एक बिटिया 2018 में लापता हुई थी, जिसकी शिकायत भी स्थानीय पुलिस स्टेशन में उसके परिवार ने दर्ज करवाई थी। बेटी के वियोग में उसका परिवार बिलखता रहा लेकिन स्थानीय पुलिस ने इस मामले में शुरूवाती दौर में ही तलाश के बजाय लिपापोती करती रही। इसके बाद यह मामला ‘परिवर्तन फाऊंडेशन’ तक पहुंचा, जिसके बाद उक्त संस्था से जुड़े लोगों ने भी काफी प्रयास किया। संस्था के अध्यक्ष राजकिशोर तिवारी बताते हैं कि ‘थक-हारकर हमनें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सितंबर 2019 में पत्र लिखकर गुहार लगाई। स्पीड पोस्ट भेजते समय यह आशा थी कि शायद फतेहपुर पुलिस उनके आदेश पर नींद से जाग जाये लेकिन ‘योगीराज’ दरबार से भी बिलखते परिवार का आंसू नहीं पोछा जा सका। आखिरकार 8 महीनें बाद उक्त पत्र की याद आई तो उसे उन्होंने 21 मई ‘जन सुनवाई’ पर डलवा दिया, जिसके बाद फिर बिलखते परिवार का जख्म कुदेर उठा लेकिन आशा की किरण जगी कि शायद अब बेटी मिल जाये।
फिर एक ऎसा जवाब आया कि हमेशा खामियों से सुर्खियों में रहने वाला ‘जन सुनवाई’ पोर्टल से कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अब शायद खुद को ठगा महसूस करें। मुख्यमंत्री द्वारा ‘जन सुनवाई’ पर बेटी की तलाश के लिए पत्र भेजा गया कि लापता बिटिया को तलाश करें। फतेहपुर पुलिस ने उन्हें ‘जन सुनवाई’ में आख्या भी दे दिया है कि ‘मार्ग’ पर अतिक्रमण नहीं है। ऐसी स्थिति में हम किस युग में जी रहे हैं और ‘जन सुनवाई’ कैसी हो रही है यह तो जांच-परख से ‘योगीजी’ खुद तय कर सकते हैं।
फिलहाल इस मामले में भी फतेहपुर जिले के एसपी प्रशांत वर्मा से 9454400268 सीयूजी नंबर पर गुरूवार की रात 9 बजे संपर्क किया गया, ताकि सही जानकारी या प्रतिक्रिया मिल जाये क्योंकि दिनभर ‘पीआरओ’ ही इस नंबर पर बहानेबाजी करते रहते हैं। रात में भी आश्चर्यजनक आवाज आई कि एसपी निवास से बोल रहा हूँ बोलिये और जब प्रतिक्रिया लेने हेतु ‘सशक्त समाज न्यूज’ टीम ने काम बता दिया तो वही बहानेबाजी कि अभी आफिस में बैठेंगे तो बात करवां दूंगा लेकिन रात साढ़े 11 बजे तक शायद वे आफिस में बैठे नहीं क्योंकि कोई रिप्लाई नहीं आया।’
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