लाॅकडाऊन से पहले मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग जो प्रतिदिन, सप्ताह, अर्धमासिक या मासिक रुप से काम करके अपना धनार्जन करते थे। अपने सभी कार्य लोन या EMI द्वारा लोन लेकर अपना भविष्य सवांरते थे। लेकिन अब न प्रतिदिन, सप्ताह, अर्धमासिक या मासिक रुप से कमाई रुक जाने के कारण वह लोग अपना लोन या EMI नहीं जमा कर पा रहे हैं। जिसके कारण लोन देने वाली कंपनियां लोन के साथ-साथ अतिरिक्त चार्ज भी लगा रहे हैं। ऐसे में वह परिवार का खर्च देखे या लोन भरें।
केन्द्र सरकार और राज्य सरकार लोन देने वाली कंपनियों को निर्देशित करे कि किसी भी लोन पर अतिरिक्त चार्ज न लगाएँ । क्योंकि इस महामारी में वह परिवार संभाले या लोन का अतिरिक्त चार्ज भरें। जगजाहिर है कि 23 मार्च 2020 लाकडाउन शुरू हुआ है। मार्च और अप्रैल महिने का मासिक आय नहीं मिला हैं, वह परिवार कैसे गुजारा करें, इस विषय में भी सरकार विचार करे। सरकार द्वारा निर्देशित चावल, दाल व गेहूँ प्रत्येक गाँव में कोटेदार द्वारा भेजने की बात कह रहे हैं। लेकिन कोटेदार उसमें भी सेंध लगाने में पीछे नहीं हो रहे हैं। साथ ही राज्य सरकार द्वारा जो चिन्हित गरीब, लाचार, ऊपजाउ भूमिहीन व्यक्ति को एक हजार के बदले में कम से कम पाँच -पाँच हजार रुपये मासिक दिया जाए। क्योंकि दाल,चावल और गेहूँ के अलावा सब्जी,मसाले आदि की जरुरत होती है। केंद्र सरकार से ऐसे सुझाव व मांगों पर विशेष ध्यान देने हेतु, पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच के आनन्द कुमार शुक्ल (अधिवक्ता) ने अपील की है।


