उत्तर प्रदेश के लाखों लोग मुंबई ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में रोजी-रोटी कमाते हैं और अधिकांश यहां की मिट्टी व संस्कृति में घुल-मिलकर व्यवसायिक व नौकरीपेशा बड़े-बड़े ओहदे पर भी विराजमान हैं। ऐसे में उत्तर भारतीयों द्वारा राजनीति में भी गहरी पैठ की गई है, जिनके अड़ियल बयान भी कई बार घातक साबित हुये हैं। नये-नवेले मजदूर, ठेला व टैक्सी-रिक्शा चालक भी कभी-कभी इन्हीं प्रांतवादी नेताओं की यूनियनबाजी के चक्कर में संस्कार-संस्कृति भूल जाते हैं, जिसके चलते खामियाजा भी भुगतना पड़ा हैं। फिलहाल इस बार यूपी सत्ताधीश योगी आदित्यनाथ की नई नीतियों से आॅग सुलगी है, जिसमें गरीबों की रोटियां झूॅलसेगी ऐसा तय माना जा रहा हैं।
गौरतलब है कि मुंबई में रिक्शा-टैक्सी चालकों का परमिट हो या बैच, राशन कार्ड व आधार कार्ड से ही बनता है। यदि राशन कार्ड है तो यहां यूपी के कोटेदारों की तरह धांधली नहीं चलती है। भले ही कोई राशन दुकानदार प्रशासन की चोरी से वजन में औना-पौना मारता हो लेकिन राशन कार्ड पर बड़ी आसानी से अनाज वगैरह मिलता है। प्रशासन को छोटी सी भी शिकायत मिली तो त्वरित एक्शन होता है। फिलहाल जिस ‘राशन कार्ड’ से रिक्शा-टैक्सी परमिट व बैच वगैरह लिया गया, उसी पर मुफ्त अनाज ना लेकर बेठिकानें मजदूरों की देखी-देखा उक्त वाहन लेकर अधिकांश उत्तर प्रदेश वाले गांव चले गये हैं। बताया जा रहा है कि इन्होनें बिना परमिशन ही कोरोना संकट से भयभीत होकर यह कदम उठा लिया। फिलहाल यूपी में बैठे राजनेताओं की सियासत फिर से इन्हीं गरीबों की रोटी झुॅलसायेगी और मुंबई वापसी पर संकट मंडरायेगा। ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होनी शुरू हो चुकी है।
यूपी के सीएम ‘योगी’ को मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे की खुली चेतावनी…सप्रेम जय महाराष्ट्र! उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के मजदूर चाहिए तो उत्तर प्रदेश सरकार की इजाजत लेनी होगी। अगर ऐसा है तो आगे से महाराष्ट्र में आते हुए भी हमारी, महाराष्ट्र की, यहां की पुलिस की इजाजत लिए बिना यहां नहीं आ सकेंगे। इस बात का महाराष्ट्र सरकार भी गंभीरता से ध्यान रखे। आगे से मजदूरों को लाते हुए उनके फ़ोटो और परिचयपत्र पुलिस स्टेशन में जमा कराया जाना चाहिए। महाराष्ट्र को कड़ाई से इसका पालन करना चाहिए – राज ठाकरे
- मनसे प्रवक्ता डा. वागीश सारस्वत ने इस मामले पर ‘सशक्त समाज न्यूज’ द्वारा पूछे जाने पर कहा कि ‘उत्तर प्रदेश बैठकर ‘मुंबई व्यवस्था’ पर जो नेता बेवजह टिप्पणी कर रहे हैं, उनकी वजह से भविष्य में समस्यायें उत्पन्न होना तय है क्योंकि इस तरह के बयान आग में घी डालने का काम करते हैं। हमारी पार्टी (मनसे) मुंबई में बसे उत्तर भारतीयों के विरोध में नहीं है लेकिन ऐसे बयानबाज उत्तर भारतीय नेताओं का विरोध जारी रहेगा। इन्हीं लोगों की वजह से गरीब उत्तर भारतीयों के मुंबई प्रेम में द्वैष फैलता है।



