उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में निर्माणाधीन १०० बेड वाला अस्पताल ११ साल बाद भी कोरोना संकट में मरीजों का इलाज छोड़िये ‘क्वारंटीन’ के लायक नहीं बन पाया, जिसे कोरोना संकट में स्वास्थ्य सेवा हेतु ‘हैंडओवर’ के लिए गांव-शहर ही नहीं बल्कि परदेश से भी भदोहीवासियों ने सोशल मीडिया पर ‘जनसंघर्ष मुहिम’ छेड़ते हुये जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। भ्रष्टाचार से ‘भूत ग्रस्त’ इस अस्पताल की दास्तान सिर्फ एक बानगी है कि १८ करोड़ खर्च से करीबन ९० प्रतिशत निर्माणकार्य ११ साल बाद पूर्ण तो बताया जा रहा है लेकिन अब ‘हैंडओवर’ से पहले ही ‘खंडहर’ बना यह अस्पताल खुद बीमार हो चुका है…
गौरतलब है कि कोरोना संकट ने भदोही जनपद के स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दिया है, जहां जिला स्तरीय अस्पताल में भी वेंटिलेटर की सुविधा नहीं है। एक्सरे से लेकर खून जांच तक की व्यवस्था भी चरमराई पड़ी है। करोड़ों रूपये स्वास्थ्य सेवा के नाम पर यहां सभी सत्तासीन सरकारों के नुमांइदे तो लेकर आये लेकिन उससे पूर्व बने अस्पतालों की सुविधा बढ़ाने के बजाय, नये निर्माणकार्य में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिये। मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर करने के लिए वर्ष २००८ में बसपा शासन के दौरान जिला मुख्यालय के सामने १४ करोड़ की लागत से उपरोक्त १०० बेड वाले अस्पताल की योजना को स्वीकृति मिली थी। इसके निर्माण का जिम्मा राजकीय निर्माण निगम को दिया गया था। अस्पताल निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था ने करीब छह ठेकेदार बदले, लेकिन फिलहाल ११ साल बाद भी अस्पताल ‘हैंडओवर’ नहीं हो सका। ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र के साथ औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर भी इस मामले को सदन में उठा चुके हैं। २०१५ में तत्कालीन जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने निर्माणाधीन अस्पताल की निजी एजेंसी से जांच भी कराई थी। उस दौरान करीब ८ करोड़ ३३ लाख की घपलेबाजी सामने आई थी।
परियोजना प्रबंधक गये थे जेल…इस मामले में कार्यदायी संस्था के तत्कालीन परियोजना प्रबंधक गिरजाशंकर दीक्षित, ठेकेदार रामकुमार सिंह, हंसराज सिंह, मुंशी सिंह के खिलाफ धारा 406, 409 के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। जिन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया गया था, उसमें सरकारी धन का गबन और आपराधिक न्यास भंग करना प्रमुख रहा। परियोजना प्रबंधक को जेल भी जाना पड़ा, हालांकि अभी वह जमानत पर हैं। 14 करोड़ की लागत वाले अस्पताल पर अब तक 18 करोड़ से अधिक रकम खर्च हो चुकी है, लेकिन अस्पताल चालू नहीं हो सका है।
जारी है SIT जांच…पिछले वर्ष नवंबर में विशेष सचिव स्वास्थ्य विभाग की संस्तुति पर गृह विभाग ने जांच की जिम्मेदारी एसआईटी को सौंपी थी, जिसके बाद इस वर्ष मार्च में एसआईटी ने पूरे प्रकरण की फाइल स्वास्थ्य विभाग से तलब की। उक्त दौरान भदोही मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी सिंह ने भी मीडियाकर्मियों को स्पष्ट बताया था कि एसआईटी ने कुछ फाइलों की मांग की थी, जिसे भेज दिया गया है। इसके बाद माना जा रहा था भ्रष्टाचारी जल्द ही सलाखों में पहुुंच जायेगें। फिलहाल यह अस्पताल अभी भी करोड़ो खर्च व घोटाले की जांच के बाद भी भदोोही वासियों वासियों के लिए ‘स्वास्थ्य सेवा’ में ‘बांझ’ साबित रहा है।

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