क्वारटींन सेंटर – ‘नोडल अधिकारी’ की ‘बज’ रही ‘घंटी’, जानिये ‘प्रधान’ सहित ऐ भी ‘राडार’ पर…

कोरोना संकट में अब परदेशी तेजी से गांव की ओर लौट रहे हैं, जिससे नोडल अधिकारी के मोबाइल की घंटी भी लगातार टनटना रही है। ऐसे में क्वारटींन सेंटर व सुविधा देने में लापरवाही बरतने पर ग्राम प्रधान के साथ कई अन्य संबंधित जिम्मेदार मुसीबत में फंस सकते हैं।

गौरतलब है कि भदोही जनपद के विभिन्न गांवों में तेजी के साथ परदेशी लौट रहे हैं। अन्य प्रांत से जो रेलवे ट्रेन से लौट रहा है उसकी सुची उपलब्ध होने से उस पर शासन-प्रशासन की नजर है। कुछ लोगों को जांच के बाद शेल्टर होम में क्वारंटाइन करवाया जा रहा तो, कुछ को लक्षण ना मिलने पर होम क्वारंटाइन रहने की हिदायत देकर घर पहुंचाया जा रहा है। मुख्यतः मुसीबत निजी वाहनों के साथ बाइक व साइकिल से लेकर पैदल ही अपने गांव में पहुंच जाने वाले बढ़ा रहे हैं। गांवों में लौट रहे परदेशियों के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने के साथ उन्हें जांच व क्वारटींन की सुविधा मुहैया करवाने हेतु निगरानी समितियों का गठन कराया गया है, जिसमें ग्राम प्रधान, लेखपाल से लेकर आशा, आंगनबाड़ी सहित अन्य को सदस्य बनाया गया है।

परदेशियों के इंतजार में, कोरोना संकट से बचायेगा गांव…

फिलहाल भदोही के कई गांवों से लापरवाही की शिकायतें सीडीओ विवेक त्रिपाठी के मोबाइल नंबर टनटना रही है क्योंकि बतौर नोडल अधिकारी उनका नंबर वायरल होनें की वजह ग्रामवासियों या गांव पहुंचे परदेशियों के पास है। कई गांवों के प्रधान सहित अन्य संबंधित जिम्मेदारों को फटकार लगने की खबरें भी मिल रही हैं। शासनिक अधिकारियों की सक्रियता से कुछ ग्राम प्रधानों की कुंभकर्णी नींद तो टूटी है लेकिन कई गांवों के प्रधान व उनके भ्रष्टाचार संरक्षक शासनिक मुलाजीम राडार पर आ चुके हैं।

सक्रिय हैं ग्राम प्रधान व ग्रामवासी…

क्या कहते हैं नोडल अधिकारी – भदोही जनपद के नोडल अधिकारी विवेक त्रिपाठी से ‘सशक्त समाज न्यूज’ ने बातचीत की, जहां उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम प्रधानों को प्राइमरी स्कूल या पंचायतघर सहित गांव के बाहर सुविधाजनक स्थान पर व्यवस्था करने हेतु निर्देशित किया गया है, जहां सड़क के रास्ते पहुंचने वालों परदेशियों को क्वारटींन सेंटर बनाकर रोका जायेगा। इसके बाद शासनिक स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनके स्वास्थ्य की जांच करवाई जायेगी। इसके बाद घर पर जाने हेतु उचित निर्णय लिया जायेगा। परदेशी स्वत: सहयोग करें नहीं तो, उनका परिवार व गांव संक्रमण के संकट में फंस सकता है, जिसके बाद पूरा गांव सील करके सबके स्वास्थ्य की जांच के बाद भी उबर पाना मुश्किल होगा।

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