कोरोना संकट में गांव की गलियों से परदेशियों के खिलाफ उठने वाली आवाज पर ‘मातृभूमि संकल्प’ युवा नेतृत्वकार सुरेंद्र पाठक (गुड्डू) ने रोष जताया है, जिसके बाद चेतावनी भरे लहजे में बेईंमानों को होश में रहने की हिदायत भी दी है।
गौरतलब है कि भदोही जनपद के कई गांवों में ‘मातृभूमि संकल्प’ विचारधारा प्रज्ज्वलित करके सुरेंद्र पाठक (गुड्डू) की टीम ने मुंबई से सार्वजनिक-धार्मिक स्थलों के जिर्णोद्धार की मुहिम छेड़ी थी, जिसके बाद विगत् दो-तीन वर्षो में मुंबई-दिल्ली जैसे शहर के परदेशियों ने अपने-अपने गांव में सक्रियता से गौरान्वित कार्य किया है। ‘सशक्त समाज न्यूज’ को मिली प्रेस विज्ञप्ति में कहा कहा गया है कि कोरोना संकट में कुछ गांव-समाज के मनबढ़ू लोग ऊल-फजूल व परदेशियों को अपशब्द से नवाज रहे हैं, जोकि एक मुर्खतापूर्ण कार्य है। गांव-समाज को इन्हीं परदेशियों ने मजबूती से सींचा है, जिनकी वापसी पर चिल्लहट मचाया जा रहा है। सभी ग्राम के वासियों व परदेशियों को चाहिये कि आंतरिक तौर पर एक wtapps ग्रुप बनाकर आपसी सामंजस्य बैठाये। रेलवे से जाने वालों की जांच उतरते ही शासन द्वारा करवाया जा रहा है, जो सड़क के माध्यम से पहुंच रहे उनका सहयोग करके उन्हें स्वप्रेरित करते हुये उन्हीं शासनिक स्वास्थ्य टीम बुलाकर जांच करवायें। इसके बाद परदेशी स्वयं एकांतवास यांनि क्वारटींन का पालन करें। ऐसी स्थिति में कुछ युवा परदेशी जो मनबढ़ू हों उन्हें गांव के बाहर स्कूल वगैरह में सशक्त होकर क्वारटींन करवाया जाय।
महंगा पड़ेगा अपमान – गांव के कुछ कुटिनीतिक व राजनीतिक लोग जो परदेशियों पर बेवजह अपमानजनक टिप्पणी कर रहें हैं, वे बेईंमान होश में रहें। सुरेंद्र पाठक (गुड्डू) आगे कहते हैं कि फर्जी गरीबी वाले राशन कार्ड व दलाली के सहारे गांव में डेरा जमाये लोग सावधान हो जायें क्योंकि कारनामों की पोल जब परदेशियों द्वारा खोलना शुरू किया जायेगा, तब यह परदेशियों का अपमान करना महंगा साबित होगा।
http://www.sashaktsamaajnews.com/2020/05/10/primary-school-ready-for-pardeshi/


