भदोही जनपद में जहां कुछ जनप्रतिनीधि कोरोना की महामारी को लेकर सिर्फ सोशल मीडिया पर आश्वासन देकर वाहवाही लूटते रहे, वहीं शासन भी योजना क्रियान्वित करने में व्यस्त। पुलिसकर्मियों द्वारा क्षेत्रिय सहयोग से तत्काल भूख मिटाने हेतु कहीं बनाया हुआ भोजन तो कहीं अन्न व सामग्री पहुंचाया जा रहा था। इसी दौरान 30 तारीख की रात गांव की गलियों से बूझे हुये चूल्हे की खबर बीडीसी आशीष सिंह को मिली। ऐसे में रात भर नींद नहीं आई और सुबह होते ही गांव की ओर दौड़ पड़े।
गौरतलब है कि सुरियावां ब्लाक से जुड़े बीडीसी आशीष सिंह क्षेत्र की सेवा में हमेशा जुटे रहते हैं। बीडीसी आशीष सिंह की मानें तो लाॅकडाऊन के कड़े नियमों का पालन करते हुये वे 30 तारीख की रात सुरियावां स्टेशन के करीब वाले मकान में ठहरे थे। गांव नहीं पहुँच पाये थे लेकिन देर रात पता चला कि लाॅकडाऊन से गांव की दलित बस्तियों सहित कई दिहाड़ी मजदूरों के घर में भोजन की व्यवस्था नहीं है। कई घरों के चूल्हे बूझे हैं, बच्चों व बुजुर्गों सहित अन्य का भूख से बूरा हाल है। इतनी जानकारी मिलते ही आशीष सिंह बताते हैं कि रातभर नींद नहीं आई और वे सुबह भदोही सीओ व स्थानीय पुलिस को सुचना देकर मजबूरन लाॅकडाऊन में भी एक टैम्पों खाद्य सामग्री कुछ साथियों की मदद से पैकिंग करवाकर दोपहर में क्षेत्रिय गांव की ओर भागे। फिर बलीपुर, पुरेबदल, बिसापुर, हरीहरपुर, बहुता, तुलापुर, पुरेखुशहाल इत्यादि गांव के बनवासी बस्ती में खाद्य सामग्री वितरित किया गया। बीडीसी आशीष सिंह की टीम ने 2 कुंतल आटा, 1.50 कुन्तल चावल, 1:50 कुन्तल आलू, 50 किलो बैगन, 50लीटर सरसो का तेल, 200 पाऊच एवरेस्ट मसाला, 100 लाईफ ब्वाय व डिटाल साबुन, 50 किलो नमक, मिर्चा हरा जैसी सामग्री एकजुट करके पार्सल बनाया। पुलिस अधिकारियों व पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ गरीबों के घर चूल्हे जलवाकर ‘आशीष’ लिया।
बीडीसी ने इस दौरान क्षेत्रिय ग्राम प्रधान व कोटेदारों से अपील भी किया कि ‘संकट की घड़ी मे सभी लोगो से निवेदन है कि जिससे जो हो सके वो, जरुरतमंद लोगो की मदद करें। फिलहाल संवाददाता द्वारा आज यह दास्तां लिखते समय बीडीसी आशीष सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि उक्त क्षण क्षेत्रवासी दलित व दिहाड़ी मजदूरों के लिये काफी पीड़ात्मक था लेकिन अब उक्त गांव के प्रधान व समाजसेवी जागरूकता पूर्ण सेवाभावी कार्य में जुटे चुके हैं और अब तो धीरे-धीरे कोटे पर अनाज भी पहुँच रहा है। क्षेत्र के युवाओं से संपर्क जारी है और यदि कहीं बूझे चूल्हे की झलक दिखेगी तो तत्काल प्रभाव से मदद हेतु तत्पर रहूंगा।



