वाराणसी में जिला मुख्यालय पर सोमवार को गैंग रेप पीड़िता ने माता-पिता संग जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की। आनन-फानन उपस्थित लोगों ने उसे नजदीकी अस्पताल में पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने तीनों की गंभीर हालत देखते हुये बीएचयू ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया। इस घटना की जानकारी होते ही आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए। मौके से मिले सुसाइड नोट में उसने कैंट सीओ, इंस्पेक्टर व पहडिय़ा चौकी इंचार्ज पर बयान बदलने का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है।
घटना चक्र – गैंग रेप पीडि़ता द्वारा दर्ज करवाये मामले के अनुसार वह कैंट रेलवे स्टेशन पर टीसी (टिकट कलेक्टर) के पद पर तैनात जमील आलम के संपर्क में आई। जमील ने कई बार उसकी अस्मत लूटी और फिर फिल्मों में काम दिलाने के बहाने मुंबई ले गया। वह 19 अक्टूबर को मुंबई पहुंची, वहीं पर जमील ने पीडि़ता को बेच दिया। उसके बाद कई लोगों ने बारी-बारी से दुष्कर्म किया। किसी प्रकार वह वहां से भाग निकली। इलाहाबाद आने पर जीआरपी के जवानों ने शक वश उससे बात की तो पूरे प्रकरण से अवगत कराया। मामला बाद में कैंट जीआरपी के हवाले कर दिया। पीडि़ता के बयान के बाद कैंट थाने में जमील आलम व उसके दो साथी विशाल मौर्या व उत्कर्ष तिवारी के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया। जमील व विशाल को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
घटना क्रम में मोड़ – इसी बीच 12वीं में पढ़ रहे पीडि़ता के भाई की मौत हो गई। पीडि़ता का आरोप है कि उसके भाई की आरोपियों ने हत्या कर दी। एसएसपी प्रभाकर चौधरी के हस्तक्षेप के बाद तीनों के खिलाफ हत्या का भी मुकदमा दर्ज कर लिया गया। पीडि़ता का आरोप है कि कैंट सीओ व कैंट थाना प्रभारी बराबर इस बात का दबाव बना रहे हैं कि आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में बयान न दे सके। इससे आजिज आकर पीडि़ता अपने माता-पिता संग सोमवार को मुख्यालय पहुंची और एसएसपी से मिलना चाही। एसएसपी के अनुपस्थिति में वह बाहर आई और अपने माता-पिता विषाक्त पदार्थ का सेवन कर लिया।



