विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी 2017 में कुलदीप सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया. 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें बांगरमऊ सीट से प्रत्याशी बनाया और वह लगातार चौथी बार विधायक निर्वाचित हुए. पत्नी संगीता सेंगर लगातार दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं और पहली बार जिला पंचायत अध्यक्ष है…✍️
बलात्कार के आरोपी उन्नाव की बांगरमऊ सीट से विधायक कुलदीप सेंगर को दिल्ली की तीस हज़ारी अदालत ने दोषी करार दिया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस लखनऊ से दिल्ली कोर्ट ट्रांसफर हुआ था. इसके बाद 5 अगस्त से रोज़ाना बंद कमरे में सुनवाई हो रही थी. कोर्ट ने कुलदीप सेंगर पर आपराधिक षड्यंत्र, अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप तय किए हैं. फिलहाल, वह तिहाड़ जेल में बंद हैं. एक दौर ऐसा भी था जब यूपी की सियासत में सेंगर की तूती बोलती थी. उन्होंने हर दल की राजनीति की लेकिन इस केस ने उनके सियासत पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं.
राजनीतिक सफर – कुलदीप सिंह सेंगर का राजनीतिक सफर ग्राम पंचायत की सियासत से शुरू हुआ था. एक बार उन्नाव के माखी गांव के प्रधान रहे कुलदीप ने युवा कांग्रेस से सक्रिय राजनीति में कदम रखा था. साल 2002 में कुलदीप ने बसपा से उन्नाव सदर सीट से पहली बार सक्रिय राजनीति में कदम रखा और विधायक चुने गए. 2007 में उन्होंने सपा का दामन थामा और बांगरमऊ से विधायक बने.
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फिलहाल भाजपाईयों की गलियों में इन दिनों चर्चा जोरों पर है कि दलबदल भाजपा आये और टिकट पाकर भले विधायक बन सफर पूरा कर रहें हैं लेकिन सत्तादल में बैठ ‘सुशासन’ को ठेंगा दिखा रहें हैं। कुलदीप सेंगर जैसे उत्तर प्रदेश में कई दलबदलू विधायक हैं जो भ्रष्टाचार, अत्याचार के साथ कोहराम मचाये हैं। मुख्यतः ऐसे विधायकों की वजह से स्थानीय भाजपा संगठन पदाधिकारी भी ‘पंचनिष्ठा’ याद करके परेशान हैं। योगीराज के सुशासन के डंडे से ऐसे विधायक बचे हैं, जिनके जुल्मों सितम का कहर ढ़ो रही आम जनता त्रस्त है। इन विधायकों की हूकूमत का दंभ उच्च न्यायालय में लंबी लड़ाई से पहले नहीं टूट रहा है।




Bhai log up me Bhumafiya portal ka koi sunwai nhi hai kya Garibo ke sath atyachar chor aur Gunda kism ke logo se chutkara kab up me hogaa