गांव-समाज के विकासशील कार्यों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी ग्राम प्रधान की होती है, जहां यह सेवाभावी कार्य महिला प्रधान होनें पर उनके पति व पारिवारिक सदस्य भी वर्षों से करते आ रहे थे। फिलहाल इस प्रथा पर लगाम लगाने की शासनिक कवायद शुरू हो गई है। यूपी में अधिकांश महिला प्रधान ‘घुंघट’ बैठी रह जाती हैं और उनके हस्ताक्षर से लाखों की घपलेबाजी उनके पति या पारिवारिक सदस्य करके खद्दरधारी नेता बन जाते हैं।
गौरतलब हो कि भदोही जनपद के महुआरी (धनी पुर) गाँव में प्रधान परिवार के सदस्यों व उनके कई रिश्तेदारों ने ‘सशक्त समाज’ न्यूज नेटवर्क की खबर ‘भदोही कंठ (६)’ को तत्परता से पढ़ा, जिसके बाद सैकड़ो प्रतिक्रियायें विभिन्न माध्यम से प्राप्त हुई। न्यूज पोर्टल से खबर हटवाने के लिये भी चंद लोगों द्वारा असफल प्रयास भी किया गया। यहां स्पष्ट कर दिया गया कि किसी खबर के प्रकाशन उपरांत उसे ‘छिपाने’ या ‘हटाने’ की व्यवस्था ‘उपलब्ध’ नहीं है। जगजाहिर है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया समूह के प्रकाशक-संपादक किसी खबर को हटाते या छिपाते तभी हैं कि जब वे संतुष्ट हों कि खबर ‘जनहित’ या ‘देशहित’ में नहीं है।
खबर हटाइये, प्रधानजी हमारे रिश्तेदार हैं.! सबसे चौकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि ‘भदोही कंठ (६)’ के प्रकाशन के बाद ‘सशक्त समाज’ के एक गृह जनपदीय कलमकार पर प्रधान ‘पति’ के आधा दर्जन संबधियों व रिश्तेदारों ने खबर न्यूज पोर्टल से हटवाने का दबाव बनाया। प्रधान ‘पति’ को स्वयं का रिश्तेदार बताकर एक भ्रष्टाचार के मुद्दे की खबर हटवाने हेतु जो प्रयास कर रहे थे, जाने-अनजाने में ही कहीं ना कहीं वे भ्रष्टाचार के आरोप से घिरे जांच की दहलीज पर खड़े प्रधान परिवार की हिकाकत कर रहे थे। ऐसे में कहा जा सकता है कि ग्रामवासियों की सरकारी सुविधाओं का गबन करने वालों के रिश्तेदारों की भी शायद समांतर नस्ल हो। बड़े शर्म की बात है कि निष्पक्ष कलमकारों को फर्जवान बनाने हेतु रिश्तेदार नेटवर्क वाले आते हैं वो भी भ्रष्टाचार मामले के जांच की दहलीज पर.!

खैर…पंच शपथपत्री शिकायतकर्ता जांच हेतु शासनिक अधिकारियों का इंतजार कर रहे हैं, वहीं जानमाल सुरक्षा हेतु भदोही डीएम व एसपी की शरण में शिकायती पत्र भी दे चुके हैं। अब तो यह शासनिक जांच में स्पष्ट हो पायेगा कि विकास कार्यों में लाखों धांधली हुई है या नहीं..।

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