कलकत्ता के सुप्रसिद्ध मंदिर की अद्भुत छटा, यहां बिखरी ७०० किलो कोहड़ा के बीज से…

उल्हासनगर – पवई चौक स्थित लायन्स क्लब के गार्डन में कलकत्ता की संस्कृति व सभ्यता को परोसने का काम पिछले 10 साल से नवरात्री महोत्सव के दौरान किया जाता रहा हैं। इस वर्ष कलकत्ता के दक्षिनेश्वर मंदिर की भव्य प्रतिकृति का पंडाल बनाया गया है, जिसे देखने रोजाना हजारो की संख्या में लोग उपस्थित हुये।
 बता दें कि कलकत्ता शहर अपनी संस्कृति व अलग – अलग भव्य मन्दिरों को लेकर विश्व प्रसिद्ध है। कलकत्ता के कल्चर व संस्कृति को जीवंत रखने के लिए माँ शक्ति सेवा नामक संस्था हर वर्ष नवरात्र में कलकत्ता के प्रसिद्ध मंदिरों के कलाकृति जीवंतता को पंडाल के रूप में स्थापित करती आई है। इस वर्ष उल्हासनगर के पवई में कलकत्ता के हुबली नदी के किनारे बने दक्षिनेश्वर काली मंदिर की प्रतिमूर्ति बनायी गयी। माँ शक्ति सेवा संस्था के अध्यक्ष विनीत साव ने ‘सशक्त समाज’ को बताया कि पंडाल का निर्माण कार्य दो माह पूर्व से शुरू हो जाता हैं।इस वर्ष कलकत्ता के 36 कारीगर को लाया गया था। मंदिर की ऊंचाई 60 फिट, 3 डी अर्थात 3 तरफ से समान रूप से दिखाई दिया।  40 महिलाओं ने कोहड़े के बीज व सरसो से सजावट की। 700 किलो कोहड़े का बीज व 10 किलो पीली सरसों का प्रयोग सजावट के लिए किए।
इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि काली देवी ने हिन्दू सनातन धर्म के प्रचारक स्वामी विवेकानंद के गुरु स्वामी परमहंस को दर्शन दी थी। स्वामी विवेकानन्द को गुरु स्वामी परमहंस द्वारा किये गए तरह-तरह के देखावा दर्शाया गया है। इस मंदिर में स्थापित की गई माता दुर्गा की प्रतिमा पूरी तरह से  प्रदूषण रहित अर्थात इकोफ्रेंडली  है। मंदिर के  निर्माण में कपड़ा व प्लायवुड का प्रयोग किया गया है। इस वर्ष उल्हासनगर में बरसात के चलते मंदिर निर्माण से कलाकृति बिखेरने में काफी अड़चन आयी। आज भी पूजा अर्चना के साथ साथ मंदिर निर्माण कार्य चल रहा है। इस मंदिर को देखने के लिए ठाणे जिले के कोने कोने से लोग देखने के लिए आ रहे हैं। 8 अक्टूबर की दोपहर को सिंधुर उत्सव रखा जाता हैं।  29 सितम्बर से 8 अक्टूबर तक माता के भक्तों के लिए यह मंदिर 24 घण्टे खुला रखा गया। पूजा अर्चना के साथ साथ वैद्यकीय प्रशिक्षण, चित्रकला, गीत – संगीत जैसी तमाम प्रतियोगिता भी  रखी गई । इस नवरात्र पूजा में कलकत्ता की संस्कृति की प्रस्तुति परोसने का भी काम किया गया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में विनीत साव,रणजीत साव,दीपक साव,अशोक शाह,नवीन शाहू, सतीश शाह (वकील),नीलेश साव,वीरेंद्र साहू,गोपाल शाहू,मन्नू सिंह, के अलावा करीबन दो सौ के करीब लोग  वर्षों से इस पंडाल में अपनी सेवा दे रहे हैं।
न्यूज ब्यूरो – सुरेश चौहान 

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