दिग्गज कृपाशंकर सिंह के कांग्रेस से इस्तीफे के बाद मालाड के कांग्रेसी विधायक असलम शेख की संभावित पाला बदली को लेकर जबरदस्त अफवाहों का दौर जारी है। खबर है कि असलम भाजपा की सदस्यता लेकर फिर अपनी सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं लेकिन दुविधा यह है कि न तो भाजपा का स्थानीय नेतृत्व इस संभावना को स्वीकार करने को तैयार है और खुद असलम भी आश्वस्त नहीं हैं कि झंडा-डंडा बदलने पर भी वही जीतेंगे।
विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं की संख्या का गणित भाजपा को इस सीट से मुस्लिम प्रत्याशी खड़ा करने से रोकता रहा है। यही वजह है कि पिछले विधानसभा चुनाव में यहाँ से उम्मीदवारी की पूरी तैयारी कर चुके हैदर आज़म का पत्ता कट गया था और डॉ. राम बारोट को भाजपा मैदान में उतारा मगर बारोट चुनाव हार गये। अगर असलम भाजपा में आकर इस सीट पर लड़ते हैं तो गुजराती, मारवाड़ी और इतर पारंपरिक हिंदू वोट कटने का खतरा तो है ही खुद मुस्लिम वोट भी असलम से न छिटक जाये यह आशंका बनी हुई है। इसलिए बात अफवाह तक सीमित मानकर इस बार इस सीट पर खुद जिलाध्यक्ष विनोद शेलार टिकट के लिए लॉबिंग कर रहे हैं उधर डॉ. श्याम अग्रवाल हमेशा की तरह नेपथ्य में रहकर अपना नाम आगे चलवा रहे हैं। युवा मोर्चा के एक पदाधिकारी अपनी अलग सेटिंग में हैं। भाजपा के सियासी पंडित कहते हैं कि जो नाम चल रहे हैं उनमें हर एक का टिकट कटने का पूरा तर्क भाजपा के रणनीतिकारों के पास मौजूद है। जैसे विनोद शेलार के भाई आशीष शेलार का बांद्रा से लड़ना तय है ऐसे में एक ही घर से दो लोगों को टिकट कैसे और क्यों दिया जाये? वह भी तब जबकि विनोद शेलार नगरसेवक का चुनाव हार चुके हों। डॉ. अग्रवाल के पास भरपूर पैसा हो सकता है पर चुनाव सिर्फ पैसे से नहीं जीते जा सकते। युवामोर्चा पदाधिकारी की माँ नगरसेविका है लिहाजा विधायकी का टिकट दूर की कौड़ी है। फिर कौन? यही सस्पेंस है और असलम शेख को लेकर बातें हवा में पसरी हुई हैं।
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