इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की दूसरी योजनाओं में तेजी लाने के लिए पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में 1850 करोड़ खर्च का विशेष प्रावधान किया था, जिसके तहत भदोही जनपद आये राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने जनपद के तीनों विधायकों को ५ करोड़ प्रति विधायक विकास हेतु अनुमोदित करने का आश्वासन भी दिया था। खैर…इन दिनों उक्त विकास धनराशि को लेकर जहां भदोहीवासियों में चर्चा तेज है, वहीं तीनों विधायकों ने मौनव्रतम धारण कर लिया है।
गौरतलब है कि ‘त्वरित विकास योजना’ का फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया था, जिसमें त्वरित विशेष गाइडलाइंस को भी मंजूरी दी गई थी। उस दौरान प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने मीडिया को औपचारिक जानकारी देते हुए बताया था कि ‘इस योजना में राजकीय माध्यमिक विद्यालय, महाविद्यालय, पॉलिटेक्निक, आईटीआई, स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित भवन का निर्माण करवाया जा सकेगा। इन कार्यों के लिए कमिश्नर, डीएम, जनप्रतिनिधि प्रस्ताव बनाकर भेजेंगे और सीएम इन्हें अनुमोदित करेंगे। कार्य की गुणवत्ता में कमी मिलने पर प्रशासनिक विभाग और कार्यदायी संस्था जिम्मेदार होंगे।
जनसुविधाओं का होना था निस्तारण...जलापूर्ति, जलनिकासी कार्यक्रम से संबंधित काम, लघु सिंचाई के कार्यक्रम, वनीकरण कार्यक्रम, विद्युतीकरण, विद्युत वितरण केंद्र, भूमिगत विद्युत आपूर्ति, शहरी क्षेत्रों में प्रकाश व्यवस्था, सड़कों का सुधार, पुनर्निमाण, चौड़ीकरण, सेतुओं का निर्माण, ग्रामीण सड़कों का निर्माण, वकीलों के लिए चैंबर, जनसुविधाओं का निस्तारण कार्य व सीएम द्वारा चयनित अन्य पूंजीगत कार्य ‘त्वरित विकास योजना’ के तहत होना तय था। फिलहाल इस संदर्भ में भदोही जनपद विकास हेतु ‘त्वरित विकास योजना’ के तहत आई धनराशि में जहां भ्रष्टाचार का आरोप लग रहा है, वहीं अधिकांश जागरूक विकास प्रेमियों द्वारा राज्य के मुखिया योगी आदित्यनाथ से भी विशेष जांच करवाने हेतु गुहारें लग रही है। ऐसे में भदोही जनपद के विधायकों से उनकी प्रतिक्रिया ‘सशक्त समाज’ न्यूज नेटवर्क लेने हेतु प्रयासरत है, जिससे विकास धनराशि ठगहारा कौन है यह जानकारी जगजाहिर हो सके।
👉👉योगीजी पढ़िये – मातृभूमि छलनी बिन विकास, भ्रष्टाचारियों का कीजै सर्वनाश.!


