भदोही कंठ (०६) – प्रधान ‘पति’ की ‘खद्दरधारी’ हूकूमत, जांच से ‘पहले’ ही ‘नंघई’.!
गांव-समाज -समाज में कहा जाता है कि ‘नंघा क चारी कुड़ा यांनि हिस्सा होथअ’। ऐसे ‘नंघो’ से बचने के लिये ही ग्राम प्रधान चुने जाने की शायद प्रथा शुरू हुई थी ताकि जनसमाज को न्याय मिल सके और जरूरतमंदों तक सरकारी योजनाएं पहुँच सके लेकिन यदि ‘ग्राम विकास’ हेतु निष्पक्ष- निस्वार्थ विकास कार्यों की ‘शपथ’…


