इंतजार खत्म, सस्पेंस जारी.!

अंतत: मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे ही दिया। इस इस्तीफे की सुगबुगाहट पिछले दो सालों से मुंबई के राजनीतिक गलियारों में सुनी/समझी जा रही थी। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के निष्क्रिय किये जाने पर कांग्रेस के रवैये से नाराज होकर उन्होंने अब इस्तीफ़ा दिया है। ऐसा कृपाशंकर सिंह की तरफ से कहा गया है। लेकिन कांग्रेस के अंत:पुर से छनकर आ रही खबरें बताती हैं कि उनके इस्तीफे के पीछे पार्टी के महासचिव और महाराष्ट्र प्रभारी मल्लिकार्जुन खड़गे से कृपाशंकर सिंह की पटरी न बैठ पाना है। यह अनबन पिछले एक साल से चली आ रही है। इस्तीफे वाले दिन भी खड़गे और सिंह के बीच हुई बातचीत में कड़वाहट इतनी बढ़ गई कि बाबूसाहब ने इस्तीफ़ा ठोंकना ही सही समझा। 370 तो निमित्त मात्र है। दोनों नेताओं के बीच स्क्रीनिंग कमेटी में टिकटों को लेकर हुए झगड़े की परिणति कृपाशंकर सिंह के इस्तीफे के रूप में हुई। महाराष्ट्र के प्रभारी मल्लिकार्जुन खड़गे ने कृपाशंकर सिंह से कहा कि आप पांच मिनट में मुझे मुंबई का फ़ीडबैक दीजिए। तब जवाब में कृपाशंकर सिंह ने कहा कि पांच मिनट में सभी सीटों के बारे में कैसे बता सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे मुंबई के अध्यक्ष रहे हैं। उस वक्त मुंबई कांग्रेस कैसे काम करती थी वो भी देखें। कृपाशंकर ने खड़गे से अपनी बात रखने के लिए थोडा और समय माँगा। इसके जवाब में खड़गे ने कहा कि आप अपनी राय कल हमें लिखित में भेज दीजिए और आपको आने की जरुरत नहीं है। कृपाशंकर सिंह को खड़गे का यह रवैया ठीक नहीं लगा और उन्होंने अपना इस्तीफ़ा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और खड़गे को भेज दिया। पता यह चला है कि कृपाशंकर सिंह अपने बेटे नरेंद्र मोहन को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव लड़वाना चाहते थे लेकिन पार्टी उस पर सहमत नहीं हो रही थी। पार्टी चाहती थी कि कृपाशंकर सिंह विधानसभा चुनाव लड़ें क्योंकि महाराष्ट्र में अभी पार्टी कमज़ोर है। ऐसी स्थिति में सभी वरिष्ठ नेताओं को कांग्रेस टिकट देना चाहती है। कृपाशंकर सिंह मुंबई की कालीना सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं और वहीं से अपने बेटे को टिकट दिलवाना चाहते थे।  वैसे लोकसभा चुनाव के दौरान जब मिलिंद देवड़ा को मुंबई का अध्यक्ष बनाया गया उस वक़्त भी कृपाशंकर सिंह ख़ुद मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष बनना चाहते थे अथवा लोकसभा चुनाव में गुरदास कामत की सीट से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन पार्टी ने संजय निरूपम को वहां से टिकट दिया। उत्तर मुंबई की जिस सीट से संजय निरूपम चुनाव लड़ते थे वहां से उर्मिला मातोंडकर को टिकट दिया गया था। मजा देखिये कि उर्मिला मातोंडकर भी कांग्रेस से छिटक चुकी हैं। यह स्तम्भ लिखे जाने तक कृपाशंकर सिंह ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं कि उनका अगला राजनीतिक ठिकाना कहाँ होगा अलबत्ता यह जरुर सच है कि भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना दोनों को कृपाशंकर सिंह जैसे उत्तर भारतीय चेहरे की जरुरत है।

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