भदोही जनपद में कमीशनखोरी का मामला बदस्तूर जारी है, जिस पर लगाम लगाने में उच्चाधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं. फिर भी ‘ढ़ाक के तीन पात’ जैसे हालात हैं. पढ़िए यह खुलासा….यहां कमीशन तो गटका जा चुका है, फिर पशु शेड की धनराशि जारी नहीं हो रही है।
शासनिक सिस्टम में बैठे भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने वाला यह मामला औराई क्षेत्र के लक्षमणा गांव का है, जहां यह मामला इधर कई दिनों से चर्चा में है. खबर के मुताबिक पशु शेड निर्माण में व्यापक स्तर पर धांधली का मामला सामने आया है. इस मामले को लेकर मीडिया पर वायरल हो रहे हैं एक ऑडियो में कहा जा रहा है कि मैनेजमेंट बुक यानी एमबी तैयार करने पर इंजीनियर ने ₹8000 लिया है. वह मटेरियल भुगतान तो कर दिया लेकिन मजदूर के लिए सचिव कमीशन मांग रहे हैं, यही कारण है कि अभी तक मास्टरोल तैयार नहीं किया गया. इस मामले में जिम्मेदार लोग पशु पालक से सुविधा शुल्क लेने के बाद भी जानबूझकर उनका भुगतान रोके हुए हैं. इसकी शिकायत पशुपालक ने जिले के अधिकारियों से भी की है लेकिन कोई कार्यवाही न होने से नाराजगी है।
विदित हो कि औराई विकास खंड के लक्ष्मणा गांव में चार पशु शेड का निर्माण कराया जाना था. जिसने पशु शेड का निर्माण नहीं कराया, जो पैसा दिया उसका भुगतान हो गया लेकिन अन्य का भुगतान लटका दिया गया। पशुपालक और गांव के रोजगार सेवक के बीच हुई बातचीत आडिया सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और ऑडियो में रोजगार सेवक द्वारा कहा जा रहा है कि एमबी के इंजीनियर को ₹8000 दिया गया है, जिसने भी दिया उसका पूरा भुगतान हो गया. ग्राम पंचायत अधिकारी मास्टर रोल बनाने के लिए कमीशन मांग रहे हैं जब तक उनका शेयर नहीं मिलेगा तब तक भुगतान संभव नहीं है।
पशुपालक राजेश तिवारी का कहना है कि उन्होंने बाइक बेचकर शेड का निर्माण कराया है. शिकायत करने के बाद मामले के बारे में अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए है.
लक्षमणा निवासी राजेश तिवारी ने खण्ड विकास अधिकारी को लिखे पत्र में बताया कि पशु शेड जो 19×13 है, जिसकी लागत ₹1लाख 55 हजार स्वीकृत है. जिसमें एमबी बनाने के लिए जेई ने रोजगार सेवक के माध्यम से 8 हजार की मांग की. घूस लेने के बाद भी अभी तक भुगतान नही किया. पूछे जाने पर कहते है कि जो करना हो कर लो….मेरा कुछ नही होगा. पशु पालक राजेश तिवारी ने जिला प्रशासन से उक्त प्रकरण की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करने तथा मजदूरी के पैसे का भुगतान करने की मांग की।


