भदोही जनपद की फिजा निराली है लेकिन थोड़ी सी बरसात से अस्पताल हो या मुख्यालय जलमग्न होना आम बात है. कुछ ऐसा ही नजारा ‘सशक्त समाज न्यूज’ रिपोर्टर ने भी देखा, जहां एक ब्लाक में एडीओ पंचायत भी छपकोरिआ खेलते नजर आए।
जगजाहिर है कि बरसात में हर वर्ष विभिन्न समस्याएं उत्पन्न होती हैं, जिसके निराकरण पर करोड़ों खर्च होता है. फिर भी समस्या ऐसी कि निराकरण के चक्रव्यूह को नहीं भेंद पाती है. कुछ ऐसी ही जलमग्न समस्याएं भदोही जनपद में हास्यप्रद बनी नजर आ रही है. शुक्रवार को ‘सशक्त समाज न्यूज’ टीम ने देखा कि लाखों-करोड़ों की रजिस्ट्री करने व करवाने वाले रजिस्टार आफिस परिसर में पायजामा घूंटने पर चढ़ाकर कीचड़ से लथपथ दिखे, वहीं ज्ञानपुर ब्लॉक भी इस समस्या से थोड़ा तो राहत में था लेकिन यहां बिना जूता-चप्पल अधिकारी टहलने पर मजबूर थे. ब्लाक परिसर जहां इंटरलॉकिंग से लैस है, वहीं बड़ी-बड़ी नियमावली की धज्जियाँ उड़ाकर जलनिकासी व्यवस्था में फेल है. अमूमन देखा गया कि फिसलन के शिकार न हो जाए, इसलिए अधिकांश कर्मचारी व अधिकारी बिना चप्पल-जूता मजबूरन डियुटी बजा रहे थे. मानवाधिकार संरक्षण संगठन के पूर्वांचल प्रभारी लालचंद शुक्ला चिंता जाहिर करते हुए कहते हैं कि जब विकास भवन व ब्लाक जैसे सरकारी कार्यालयों के परिसर की यह दूर्दशा है, तो आप स्वयं समझ सकते हैं कि यहां बैठने वाले अधिकारियों ने नगर व गांव-समाज की गलियों का कैसा विकास किया होगा.?।