उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सशक्त आदेश है कि कर्मचारी समय से कार्यालय में पहुंचे, जहां पहुंचकर पीड़ितों की फरियाद पर न्यायसंगत मामलों को निस्तारित करें. यह आदेश जनपद स्तर पर अमल में लाने के लिए डीएम-एसपी सहित बड़े-बड़े अधिकारी भले ही जुटे हैं लेकिन जनता के सेवक शासनिक कर्मचारी हैं कि मानते ही नहीं. ऐसे में ‘डीएम साहब’..छापेमारी मुहिम का शुभारंभ किए, जिसमें दर्जनों कर्मचारी कुर्सी छोड़िए बल्कि डियुटी से ही लापता मिले. ऐसे में मानिए ‘सिस्टम’ के ‘सिस्टमवान’ ही ‘छिछालेदर’ कर दिए हो. फिर भी ‘डीएम साहब’ ..एक दिन का वेतन काटकर वार्निंग व कारण बताओ नोटिस जारी करवा दिए और सख्त आदेश भी दिए कि बिना सूचना कोई कर्मचारी डियुटी से लापता ना हों.
एकाध सप्ताह बिता लेकिन पीड़ितों के फरीयाद व शिकायती पत्रों को अमल में लाकर फिर छापेमारी की मुहिम चल पड़ी. इस छापेमारी से हैरतअंगेज सुशासन पढ़कर आपका सिर चकरा उठेगा. खैर…गांव की गलियों में बसा जनमानस तो खुद देख रहा है लेकिन चूंकि यह ‘सुशासन’ वाली धर्मवादी सरकार है इसलिए लोकल समस्याओं पर ध्यान देने की फूर्सत किसे है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य विकास अधिकारी भानुप्रताप सिंह सहित 20 अफसरों ने गुरुवार को अलग-अलग विभागों में छापेमारी की। इस दौरान खंड शिक्षा अधिकारी औराई (बीईओ) सहित 41 कर्मचारी ड्यूटी से गायब मिले। अनुपस्थित कर्मियों का एक दिन का वेतन रोक दिया गया है। साथ ही स्पष्टीकरण मांगा गया है। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने बार-बार गायब रहने वाले कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश विभागाध्यक्षों को दिया है। यह खबर सुर्खियों में क्या चली जैसे योगीराज सरकार की नजर ही अचानक पड़ गई हो क्योंकि भदोही जिले में सुशासन को अमल कराने में सर्वाधिक समय पदभारी भदोही डीएम बतौर राजेंद्र प्रसाद के तबादले की खबर भी एक दर्जन से ज्यादा उच्च अधिकारियों की स्थानांतरित होने वाली सूची में समाहित नजर आई।



