भदोही जनपद ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। ऐसे राजनीतिक मंडी में सियासी कसरत वर्षो से कई ब्राह्मण सहित अन्य दिग्गज नेता भी करते रहें, जिन्हें भदोही जनपद वासियों ने विधायक-सांसद बनाया। मंत्री पद से भी कुछ राजनेता गौरान्वित हुये लेकिन जनता-जनार्दन की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पाये। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण पुनः समक्ष आया है, जिसे पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि कम धनराशि में मजबूत काम करके जनपद टाॅप का खिताब ‘हैट्रिकपार’ ज्ञानपुरिया विधायक विजय मिश्रा की झोली में है…✍️
एक मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक जनहित से जुड़े विकास कार्य कराने के लिए माननीयों को मिली निधि खर्च नहीं हो पा रही है। वित्तीय वर्ष खत्म होने को है, लेकिन दो विधायकों और सांसद निधि का छह करोड़ अब तक डंप पड़ा है। प्राक्कलन न मिलने से भदोही और औराई विधायक की निधि खर्च नहीं हो सकी तो सांसद निधि से जुड़े कार्य कार्यदायी संस्था की उदासीनता आगे नहीं बढ़ पाए। भदोही जिले में तीन विधानसभाएं हैं। इनमें ज्ञानपुर, भदोही और औराई शामिल हैं। एक-एक विधायक को हर वर्ष दो-दो करोड़ की निधि विकास कार्य के लिए शासन से मिलती है। क्षेत्र में विकास की गंगा बहाने का दंभ भरने वाले माननीय अपने इलाके में विकास के प्रति कितने संजीदा हैं, इसकी हकीकत निधि खर्च पर देखने से मिल जाएगी। औराई विधायक दीनानाथ भाष्कर की निधि में 2019-20 वित्तीय वर्ष में कुल दो करोड़ 50 लाख हैं। 22 काम का प्रस्ताव बने हैं, लेकिन प्राक्कलन रिपोर्ट न तैयार होने के कारण अब तक मात्र गोशाला और संपर्क मार्ग पर पांच लाख 40 हजार खर्च हो सका है। भदोही विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी की निधि में तीन करोड़ 30 लाख पड़े हैं। मात्र 10 हाईमास्ट का प्रस्ताव अब तक आया है। एक लाख विद्युतीकरण पर खर्च हो सका है। ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र की निधि के तीन करोड़ 10 लाख में से तीन करोड़ पांच लाख के प्रस्ताव पर काम चल रहा है। सांसद रमेश चंद्र बिंद की ढाई करोड़ की पहली किस्त की निधि में एक करोड़ 49 लाख प्रयागराज चला गया। भदोही के लिए बचे 96 लाख के सापेक्ष एक करोड़ 23 लाख का प्रस्ताव बना है। कार्यदायी संस्था आरईएस की ओर से खाता न खोलने के कारण एक भी काम शुरू नहीं हो सका है। योगी सरकार ने भले ही माननीयों की सुविधा के लिए विधायक निधि की रकम हर वर्ष दो करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ कर दी है, लेकिन आम जनता को इससे कोई बड़ा फायदा मिलेगा, यह कहा नहीं जा सकता। माननीय तो पूरे साल में जनता के हित में दो करोड़ भी ठीक से खर्च नहीं कर पा रहे थे।

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