यूपी में जहां जीरो टॉलरेंस और सुशासन का डंका बज रहा है, वहीं योगीराज में अपराधी हाय-तौबा करके अपनी जान बचाते फिर हैं. खैर…पढ़िए प्रदीप दूबे (भदोही ब्यूरो) व सशक्त समाज न्यूज़ टीम की विशेष पड़ताल धारावाहिक – “बाडीगार्ड“
यूं तो भदोही छोटा सा जिला है उत्तर प्रदेश का. लेकिन यह राज्य ही नहीं बल्कि अन्य जिलों का लाडला जिला कहा जाता है. इसी भदोही जिले से पूर्वांचल जिले की राजनीति में बड़ा ऊलटफेर होता है. काशी-प्रयाग मध्य बसे भदोही जिले में कानून व्यवस्था हमेशा ही चुस्त-दुरूस्त रहती है. फिलहाल इस जिले के कुछ भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को सर्वाधिक जान का खतरा महसूस हो रहा है. इसका प्रत्यक्ष प्रमाण शासनिक ‘बाडीगार्ड आवंटन सूची’ में नजर आ रहा है. इस सूची में संवैधानिक पद पर बैठे वर्तमान राजनेताओं को निशुल्क सुरक्षा व्यवस्था मिल रही है, जबकि पूर्व विधायक-मंत्री १०℅ नियमावली वाली सुरक्षा से लैस होकर बाडीगार्ड लेकर चल रहें हैं. इसमें सबसे बड़ा आश्चर्यजनक तथ्य यह भी है कि (बाडीगार्ड) सुरक्षा प्राप्त लोगों में सर्वाधिक संख्या भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं की हैं. कुछ कार्यकर्ताओं को भी निशुल्क बाडीगार्ड सुरक्षा प्राप्त है लेकिन वो कोई आम कार्यकर्ता नहीं हैं बल्कि बड़े रसूखदार विधायक-मंत्री के करीबी हैं. अब यह चर्चा का विषय यह बनना लाजमीं है कि योगीराज के सुशासन में सर्वाधिक भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को ही जान का खतरा महसूस होने का कारण क्या है.? जबकि भदोही जिले के बड़े-बड़े समाजसेवी के साथ उद्योगपति व अन्य पार्टियों के नेता बिना किसी बाडीगार्ड जिले सुशासन युक्त आबरू हवा को गौरान्वित कर रहे हैं।
बाडीगार्ड (०२) – पढ़िए…भदोही जिले में कौन-कौन है ‘बाडीगार्ड’ सुरक्षा प्राप्त.! कौन भरता है कितना शुल्क.?



