सरकार भले ही सबका साथ सबका विकास का दावा करे लेकिन आज भी बहुत ऐसे परिवार है जो सरकार की योजनाओं से काफी दूर है। और उनको सरकार की कल्याणकारी योजना का समुचित लाभ नही मिल पा रहा है। और कागजी खानापूर्ति में सब कुछ सही ही दिखाया जाता है जबकि हकीकत इससे परे है। इन समस्याओं के पीछे एक समस्या यह है कि जिले के बडे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से कोई मतलब नही है। बस उनके मातहत और नुमाइंदे जो कुछ भी रिपोर्ट लगाते है उसे ही ब्रह्म लेखनी मान लिया जाता है। और गरीब अपनी गुहार लगाने के लिए ग्राम प्रधान से जिलाधिकारी तक के यहां चक्कर लगाते लगाते थक जाता है। और अंत में थक-हार कर सब भाग्य भरोसे छोड देता है।
एक ऐसा ही नजारा कालीन नगरी भदोही के औराई क्षेत्र के कठारी में देखने को मिला है जहां एक गरीब फूलचंद गुप्ता का परिवार है जिसे आज तक आवास नसीब नही हुआ है। और घर में रहने वाले लोग हमेशा भयभीत रहते है कि कही घर भरभराकर ढह न जाये। लेकिन जिम्मेदार लोग इस गरीब की स्थिति पर ध्यान नही दे रहे है।
कठारी के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने इस मामले में बताया कि आवास के लिए नाम भेजा गया है जब नंबर आयेगा तो आवास मिलेगा। मालूम हो कि इस गरीब के अलावा गांव में कई लोगो को आवास मिला लेकिन फूलचन्द गुप्ता के गरीब परिवार के लिए प्रधान प्रतिनिधि नंबर आने की बात कहकर पल्ला झाड ले लिया। जबकि ग्रामीणों ने भी फूलचन्द गुप्ता के परिवार को आवास की सख्त जरूरत बताया। हालांकि इस मामले को संज्ञान लेकर जनप्रतिनिधि और अधिकारी क्या कदम उठाते है? यह तो आने वाला समय ही बतायेगा।


