चोट पहुंचाने वाली बयानबाजी के अलावा शायद नेताओं के पास कोई मुद्दा भी नहीं..!!
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2022 की तारीख जैसे जैसे नजदीक आ रही है प्रदेश की सियासत भी उतना ही अधिक गरमाने लगी है आलम यह है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष एक दूसरे के ऊपर जमकर निशाना साध रहे हैं.!
इस दरमियान सत्तारूढ़ दल विपक्षियों के इतिहास खंगालने में लगे हैं वहीं विपक्षी दल भी मौके को भुनाते हुए सत्ता पक्ष की हवा ढीली करने में लगे हुए हैं! भाजपा जहां हिंदुत्व के सहारे आगे बढ़ रही है वहीं कांग्रेस और अन्य पार्टियां अपनी नैया पाने में लगी हुई है! आरोप प्रत्यारोप के इस सियासी खेल में माहौल इतना अधिक गरम हो गया है कि नेता लोग देवी देवताओं को भी नहीं बख्श रहे हैं! सवाल उठता है कि क्या आरोप प्रत्यारोप की राजनीति किसी भी राज्य या देश के लिए सही है? यह कहीं से भी उचित नहीं है कि कोई भी नेता किसी भी धर्म के बारे में गलत बोले! चोट पहुंचाने वाली बयानबाजी के अलावा शायद नेताओं के पास कोई मुद्दा भी नहीं होता है! किसी भी नेता ने कभी शिक्षा की बात नहीं की महंगाई का समा धान नहीं तलाशा! देश को वास्तव में विकसित करने बच्चों में कुपोषण दूर करने के बारे में नहीं सोचा बेरोजगारी हटाने की बात नहीं की! आज के नेताओं में समाज के प्रति कोई आस्था नहीं दिखती है!अब यह देखना होगा कि उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में चुनाव आयोग का डंडा किस तरह से चलता है!


