सौ योजन समुद्र पर नल-नील के द्वारा पुल का निर्माण कराया जाता है और प्रभु श्रीराम भोलेनाथ की स्थापना कर लंका पर विजय के लिए चढ़ाई कर देते हैं। लंका में प्रवेश करते ही बंदरों के उत्पात से कोहराम मच गया।
ज्ञात हो कि क्षेत्र के अमीर पट्टी स्थित मारुति धाम में चल रही रामलीला के आठवें दिन लंका सीता खोज लंका दहन की लीला का मंचन किया गया।समूद्र द्वारा बताए गए उपाय पर नल नील ने सौ योजन समुद्र पर पुल बनाते हैं।नल और नील द्वारा बनाए गए पुल पर प्रभु श्री राम लंका विजय के लिए चढ़ाई कर देते हैं । लंका में प्रवेश करते ही राक्षसों में खलबली मच जाती है जिसकी सूचना रावण को मिलती है। लंकेश बड़े-बड़े योद्धाओं को भेजकर सभी बंदरों को खा जाने की बात कहता है। रावण की यह बात सुनकर विभीषण उसे समझाता है, किंतु वह समझने को तैयार नहीं होता और लंका से निकाल देता है। विभीषण रामादल में पहुंच कर शरणागत की रक्षा करने की बात कहते हैं और प्रभू श्रीराम सम्मान देते हुए वहीं पर उन्हें लंका का राजा बना देते हैं।इधर रामा दल में विचार विमर्श के बाद विचार किया जाता है कि एक बार पुनः किसी एक दूत को भेजकर रावण को समझाया जाए ,यदि सीता को वापस कर देता है तो युद्ध को रोका जा सकता है।भारी विचार विमर्श के बाद युवराज अंगद को रावण को समझाने के लिए भेजा जाता है किंतु वह एक भी बातें नहीं मानता और अंगद खाली हाथ रामा दल में आ जाते हैं ।इधर अंगद की बात सुनकर प्रभू श्रीराम विजय पाने के लिए लंका पर चढ़ाई कर देते है।