‘एडीओ’ पंचायत के ‘दम’ पर, ‘सरकारी’ खजाना ‘लूटने’ की ‘होड़’, जानिए..यह ‘भ्रष्टाचार’ का खेल.!!

गांव की सरकार बनते ही लूट-खसोट का खाका तैयार होनें लगा है. कहीं बंद पड़े सामुदायिक शौचालयों की सफाई के नाम सरकारी खजाना खाली हो रहा, तो कहीं खेत समतलीकरण के नाम मनरेगा धनराशि. यह सब भ्रष्टाचार खुलेआमं एडीओ पंचायत के दम पर रोजगार सेवक व सेकेट्ररी खेल रहे हैं. ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि रोजगार सेवक व सेकेट्ररी खुद अनौपचारिक रूप से बयां करते हैं।
गौरतलब है कि भदोही जनपद के विभिन्न गांवों में अभी प्रधान द्वारा ग्राम विकास कार्यों हेतु सदस्यों की भले ही खुली बैठक नहीं हो पाई हो या भले ही प्रस्ताव पास नहीं करवा पाए हैं. फिर भी नायाब रास्ते से सरकारी खजाने को पतीला लगना शुरू हो चुका है. पिछले महीनों में सामुदायिक शौचालयों को लेकर शासनिक दबाव बढ़ा था, जिसके बाद आनन-फानन में कागजी खानापूर्ति के लिए सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव की धनराशि गट समूहों के किसी सदस्य या करीबी के नाम ट्रांसफर करवाकर कमीशनखोरी की योजना बनी थी, जिसके बाद सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव के पीछे ज्ञानपुर ब्लॉक क्षेत्र में भी लाखों झाड़-फूक हुआ. ऐसे में अधूरे व बंद पड़े शौचालयों का भूत चीख-चीखकर भ्रष्टाचार की गवाही देने लगा. यह तो सिर्फ एक बानगी है क्योंकि मनरेगा जैसी योजना भी खुलेआमं भ्रष्टाचार की गंगोत्री सी बन गई है. एक स्थानीय समाजसेवी यहां तक बताते हैं कि पहले काम हो रहा है…फिर रजिस्टर पर मजदूरों की संख्या बढ़ाई जा रही है. इतना ही नहीं बल्कि दो दिन के घसछोलनी काम को ५ दिन भी दिखा दिया जा रहा है. रोजगार सेवक मेहरबान हैं तो परदेस बैठे मनरेगा मजदूर की हाजिरी लग रही है. एक गांव में तो हैरतअंगेज कारनामा यह भी है कि चाय-पान के दुकानदार की हाजिरी लगाकर वहां से मजदूरों के लिए गुटखा-सुपारी व बीड़ी की व्यवस्था हो रही है।
एडीओ पंचायत मेहरबान – जब किसी रोजगार सेवक पर प्रधान व सेकेट्ररी मेहरबान हों, तो समझिए सेकेट्ररी को एडीओ पंचायत का खुला संरक्षण है. ऐसे में भ्रष्टाचार की गंगोत्री के स्नान का ‘भ्रष्टाधन’ तो इन्हीं की झोली छलकेगी.
 उपलब्ध सनसनीखेज दस्तावेज – ‘सशक्त समाज न्यूज’ टीम के कई रिपोर्टर भदोही जनपद में इस मामले पर पड़ताल के लिए १ महीनें से कुछ गांवों में नजर बनाए हुए थे, जिसके बाद कई सनसनीखेज दस्तावेज के साथ चौकानें वाले तथ्य हाथ लगे हैं. कुछ कृषक जो ५ से १० बिस्वा खेत समतलीकरण होने पर गदगद् थे, वही अब एक या दो दिन १५ से १८ मनरेगा मजदूरों के लिए उक्त कार्य का ६० से ८० हजार का प्रस्तावित व्यवस्थापन देख खुद को छला महसूस कर रहे हैंं।
भ्रष्टाचारियों का ‘निवाला’ मत बनिए – जहां-जहां ऐसे भ्रष्टाचार की तस्वीरें साफ हो रही है, वहां-वहां कुछ जागरूक युवा गुहार लगा रहे हैं. युवा स्पष्ट कह रहे हैं कि मनरेगा के तहत खेत समतलीकरण ही नहीं बल्कि सभी सरकारी योजनाओं का लाभ लीजिए लेकिन इतना ध्यान रहे कि ग्राम विकास धनराशि कहीं आपके नाम पर चढ़कर भ्रष्टाचारियों का निवाला न बन जाए।

यह भी पढ़िए 👉गांव-गांव में भ्रष्टाचार का दलदल, ब्लाक में बिना जूता-चप्पल, छपकोरिआ खेल रहे एडीओ.!!

Leave a Reply

Discover more from सशक्त समाज न्यूज़

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading