काशी-प्रयाग_मध्य – महर्षि वाल्मीक ‘गंगा घाट’ पर, जानिए क्यों उमड़ी भीड़….

भदोही जनपद के कोइरौना कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत सीतामढ़ी महर्षि वाल्मीक गंगा तट पर महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भोर से ही मोक्षदायिनी मां गंगा की अविरल धारा में स्नान करने के लिए धीरे-धीरे श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भोले शिव का महा रात्रि, महाशिवरात्रि का पर्व आध्यात्मिक उत्सवों में सबसे महत्वपूर्ण होता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि भारतीय संस्कृति में वर्ष भर में अनेकानेक त्योहार पड़ते रहते हैं लेकिन महाशिवरात्रि का महत्व कुछ अलग ही होता है। शिव पुराण के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी एवं चतुर्दशी के सहयोग को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात का पर्व है। और महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही  महादेव और पार्वती कि  पूजा की जानी चाहिए तभी इसका फल मिलता है। वही शास्त्री हनुमान जी महाराज का कहना है कि शास्त्रों में कहा गया है कि महज शिव, शब्द का नाम जपने से ही मनोवांछित फल मिलता है शिव अर्थात जिसमें समस्त जगत  शयन कर रहा है। उसको ही शिव  कहते हैं।वैसे शिव का अर्थ होता है कल्याण, मंगल और सुखl   शिव तो साक्षात अमंगल वेश धारी है। अमंगल वेश के लक्षण हैं ।  भस्म, मृगचर्म कपाल मुंडो की माला है, परंतु कार्य मंगलदाई है, आज महाशिवरात्रि के पर्व पर लव कुश कुमारों की जन्मस्थली एवं महर्षि बाल्मीकि आश्रम, धमासा नाथ आश्रम, सीता समाहित स्थल शिव मंदिर के साथ प्रमुख शिव मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। वहीं सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए कोइरौना कोतवाली प्रभारी खुर्शीद अंसारी  के नेतृत्व में महर्षि वाल्मीकि गंगा घाट पर वैरिकेटिंग की व्यवस्था कराई गई है। ताकि श्रद्धालुओं को गंगा स्नान करने में दिक्कतों का सामना ना करना पड़े। वही सीतामढ़ी चौकी इंचार्ज श्याम जीत यादव ने अपने हमराहीयों के साथ गंगा घाट एवं  चौराहों पर मौजूद रहे।

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