सरकार जहां बच्चों को सही शैक्षणिक दिशा दिलाने के लिए प्रयासरत है, वहीं शिक्षा माफियाओं का साम्राज्य पांव पसारने से पीछे हटता नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में भदोही जनपद भी इससे अछूता नहीं है और यहां आए दिन शिक्षा माफिया के मकड़जाल में फंसने की कुछ खबरें ही सुर्खियां बन पाती है और बाकी पीड़ित अभिभावक मजबूरन कानूनी पचड़े की फजीहत से कतराते हैं क्योंकि शासनिक-प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शिकायत करने पर भी कोई ठोस कार्यवाही समक्ष नहीं आती है।
गौरतलब है कि भदोही जिले में एक बार फिर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, सीबीएसई बोर्ड वाले छात्रों को दूसरे विद्यालय से हिंदी मीडियम का प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। अभिभावकों का आरोप है कि जब उन्होंने विरोध किया तो विद्यालय के संचालक ने धमकी भरे लहजे कहा कि जो करना हो, जाओ कर लो..ऐसी स्थिति में अभिभावक परेशान होकर मौन हो गए लेकिन एक अभिभावक ने मामले को शासनिक-प्रशासनिक विभाग तक पहुंचाने की ठान लिया. प्राप्त जानकारी के मुताबिक मामला भदोही जिले के औराई थाना क्षेत्र अंतर्गत घोसिया का है, जहां पर ‘शुभम कान्वेंट स्कूल’ में सिऊर निवासी दया शंकर दुबे (गुड्डू) का बेटा आकाश दुबे आठवीं का छात्र था. ‘शुभम कान्वेंट स्कूल’ में जब टीसी-मार्कशीट लेने गया, तब विद्यालय के प्रबंधक ने उसे दो महीने से ज्यादा इधर-उधर का बहाना किया और बाद में हिंदी मीडियम का टीसी-मार्कशीट थमा दिया और विरोध करने पर जो करना हो…कर लेने की बात कही.
इससे दुखी होकर छात्र के पिता दयाशंकर दुबे ने जिला प्रशासन से और शिक्षा विभाग से न्याय की गुहार लगाई है और कहा है कि इस तरह का गलत कार्य करने वाले शिक्षा माफियाओं पर कार्यवाही हो। छात्र आकाश दुबे ने बताया कि काफी परेशान करने के बाद प्रबंधक विनोद बरनवाल ने सीबीएसई बोर्ड का मार्कशीट देने की जगह आदर्श बाल निकेतन घोसियां से हिंदी मीडियम का मार्कशीट दिए। जबकि आकाश दुबे का नामांकन शुभम कॉन्वेंट स्कूल घोसियां में किया गया था और इसकी एवज में विद्यालय प्रबंधक ने काफी फीस और तरह-तरह शुल्क भी लिए थे लेकिन अब आकाश दुबे को प्रबंधक ने हिंदी मीडियम का प्रमाण पत्र देकर अपना पल्ला झाड़ लिया। आखिर यहां सवाल उठता है कि शिक्षा विभाग की यह लापरवाही है या मिलीभगत जो कुछ कान्वेंट स्कूल बच्चों का प्रवेश और शुल्क तो सीबीएसई बोर्ड के नाम पर लेते हैं और प्रमाणपत्र हिन्दी माध्यम का देते हैं।




