उत्तर प्रदेश में आपसी सियासी जंग से बंटाधार की ओर बढ़ रहे ब्राम्हण समाज को भदोही जनपद से एक गांव ने सशक्त संदेश दिया है, जो ब्राम्हणों में एकता की ज्वाला फूंक सकता है। आपस में ‘नहीं लड़ेगें’ बल्कि ‘निर्विरोध’ चलेगें, यह नारा जिले के सदौपुर गांव में लगा।
गौरतलब है कि भदोही जनपद अभोली ब्लाक के सदौपुर गांव में सोमवार को कोटे की दुकान को लेकर विद्यालय परिसर में काफी गहमागहमी रही। जहां ग्रामीणों के माध्यम से कोटे की दुकान का निर्धारण किया जाना था। कोटे की दुकान बीते मार्च में निलम्बित हो गई थी, जिसके बाद से गांव के लोग भावापुर के कोटेदार के यहां से राशन उठा रहे थे। बीते 27 जुलाई को भी राशन की दुकान का चुनाव होना था लेकिन किन्ही वजह से उस दिन नही हो सका। सोमवार को फिर दिन निर्धारित हुआ और कोटे की दुकान के लिए अजीत शुक्ला और आनन्द शुक्ला मैदान में थे। चुनाव के दिन गहमागहमी तेज रही लेकिन कुछ ही देर बाद गांव-समाज के ब्राम्हणों का कई दिनों से चल रहा सामंजस्यपूर्ण जादू दिख गया, जब अजीत शुक्ला ने आनन्द शुक्ला का समर्थन करने की घोषणा कर दी। आनन्द शुक्ला निर्विरोध चुने गये। इस कोटे की दुकान के चुनाव में राहुल मौर्य को नोडल अधिकारी बनाया गया था। इनके साथ ग्राम प्रधान शर्मिला सिंह और ग्राम विकास अधिकारी राम शिरोमणि बिन्द भी मौजूद रहे। आनन्द शुक्ला को कोटेदार बनने पर ग्रामीणों में काफी खुशी देखी गई। इस चुनाव के दौरान सुरियावां थानाध्यक्ष विजय प्रताप सिंह और पाली चौकी इंचार्ज गुरू ज्ञानचंद पटेल के नेतृत्व में काफी पुलिस के जवान भी सुरक्षा व्यवस्था को बनाये रखने के लिए मुस्तैद दिखे। इस मौके पर शिवसागर शुक्ला ने इस जीत को लेकर सभी का आभार दिया। कहा कि यह कार्य गांव के लोगो के सहयोग से हुआ। कभी किसी को कोई समस्या नही होगी। कहा कि इस एकता और भाईचारा के संदेश से अन्य गांव के लोग भी सीख लेंगे। इस दौरान मुंबई (डोम्बिवली) में उत्तर भारतीय समाज का नेतृत्व करने वाले भाजपाई शशिधर शुक्ला भी अपने इस पुश्तैनी गांव में उपस्थित थे, जोकि कोरोना काल में वहां से उत्तर भारतीयों को कई स्पेशल ट्रेनों से गांव रवाना करने के साथ राहत सामग्री वितरण किए थे. जगजाहिर है कि डोम्बिवली के भाजपा विधायक व पूर्व राज्य मंत्री रविन्द्र चव्हाण से उत्तर भारतीय समाज की live चर्चा करवा इन्होंने पुर्वांचल (भदोही) के लिए पहली निशुल्क ट्रेन कल्याण से चलवाने में कामयाबी हासिल की थी। फिलहाल कहते हैं कि सरकारी सेवाभावी योजना गांव के हर घर तक पहुंचे इसलिए गांव के सभी धर्म समुदाय को चर्चा से एकजुटता दिखानी होगी. ब्राम्हण समाज के नेतृत्व में सामंजस्य बैठाने का श्रेय इन्होंने शिवशंकर शुक्ला सहित बुजुर्गों को दिया और कहा कि आपस में ‘नहीं लड़ेगें’ बल्कि ‘निर्विरोध’ चलेगें…यही ‘ब्राम्हणों’ के लिए ‘सशक्त संदेश’ है।



