देश के विभिन्न सुप्रसिद्ध देवस्थान इन दिनों भले सीसीटीवी से लैश हैं लेकिन शुरूआती दौर में इसकी उपयोगिता को लेकर विभिन्न चर्चाएं होती थी. शायद आपको जानकर हैरत होगी कि पंडा-पुजारियों के साथ शास्त्र मर्मज्ञों का एक तबका सदैव देवी-देवताओं के धाम को सीसीटीवी कैमरे से मुक्त रखने की हिमाकत करता था. धीरे-धीरे वक्त बदला और इसका व्यापक सदुपयोग सभी के समझ में आ गया. खैर..माँ विंध्यवासिनी धाम में इस तकनीकी को शुभारंभित करने का निर्णय कब और क्यों लिया गया.? इस रहस्य को अधिकांश मँइया के भक्त जानना चाहते हैं लेकिन इस रहस्य की जानकारी को लेकर दूर-दराज के पंडा-पुजारी अनभिज्ञता दर्शाते हैं, वहीं स्थानीय मौन होकर कुछ कलयुगी तथ्य छिपाते हैं. फिर पढ़िए..’माँ विंध्यवासिनी धाम’ के इस रहस्य पर ‘सशक्त समाज न्यूज’ के ‘सरस्वती साधक’ कलमकारों की यह पड़ताल….
माँ विंध्यवासिनी धाम एक ऐसी जागृत शक्तिपीठ है, जिसका अस्तित्व सृष्टि आरंभ होने से पूर्व और प्रलय के बाद भी रहेगा. पुराणों में विंध्य क्षेत्र का महत्व तपोभूमि के रूप में वर्णित है. ऐसे कई तथ्यों के साथ देश के 51 शक्तिपीठों में से एक (विंध्याचल की देवी) मां विंध्यवासिनी धाम वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मिरजापुर जिले अंतर्गत जाना जाता है, जहां गंगा की पवित्र धाराओं की कल-कल करती ध्वनि, प्रकृति की अनुपम छटा बिखेरती है. मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केन्द्र है, जिससे यहां भक्तजनों द्वारा लाखों-करोड़ों रूपए ही नहीं बल्कि सोने-चांदी के जेवरात का भी चढ़ावा चढ़ता है. विंध्याचल मंदिर व परिसर में सीसीटीवी लगवाने के निर्णय का तथ्य ज्यादा पुराना नहीं है. वर्ष 2016 के प्रथम महीनें में एक आस्था को झकझोरनें वाली घटना सुर्खियों में आने के तथ्य मिलते हैं, जिससे यहां शासनिक-प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सीसीटीवी कैमरा सिर्फ एक दिन में लगवाने के निर्णय का गहरा नाता है।

विंध्याचल मंदिर में विंध्य विकास परिषद की ओर से सात दान पात्र 2016 तक लगे थे. उक्त दौरान तत्कालीन परिषद के अध्यक्ष डीएम, उपाध्यक्ष एसपी और सचिव सिटी मजिस्ट्रेट थे। दानपात्र के रुपये समय-समय पर गिनकर परिषद के खाते में जमा होते हैं। इसी से मंदिर की सुविधाएं बहाल की जाती हैं। इसी कारणवश जनवरी 2016 में भी पहाड़ी ब्लाक के नायब तहसीलदार उमेश कुमार के समक्ष दो दान पात्र खोले गए। सुर्खियों में रहे तथ्यों के मुताबिक नायब तहसीलदार की देखरेख में विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष धर्मेन्द्र पाण्डेय, मंत्री अवनीश मिश्र और विंध्य विकास परिषद के लिपिक ईश्वर दत्त त्रिपाठी, सहायक लिपिक राकेश कुमार पैसों की गिनती करने लगे। इसी बीच 1 हजार के 77 नोटों वाली गड्डी गायब हो गई…
कलयुगी कथा व किरदार – नायब की नजर में जब गड्डी नहीं दिखी तो उन्होंने उसकी खोजबीन शुरू कर दी. मामला तत्कालीन एसपी और डीएम तक पहुंचा। उक्त दौरान एसपी ने दबाव बनाने पर पैसा वापस होने का खुुलासा किया था। पूरा मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन नायब तहसीलदार पहाड़ी उमेश कुमार की तहरीर पर विंध्याचल कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई करके जांच शुरू भी शुरू की थी। इस कलयुगी कथा में आरोपित विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष धर्मेन्द्र पाण्डेय, मंत्री अवनीश मिश्र और विंध्य विकास परिषद के लिपिक ईश्वर दत्त त्रिपाठी, सहायक लिपिक राकेश कुमार का समावेेेश था. इसी घटना को एक दिन में ही सीसीटीवी लगवाने का श्रेय जाता है।
सिर्फ एक दिन में लगा सीसीटीवी कैमरा – दानपात्र के पैसों की हेराफेरी के मामले को गंभीरता से लेते हुए अगले दिन (गुरुवार) को प्रशासनिक भवन में जिस स्थान पर पैसों की गिनती होती है, वहां दो सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए। तत्कालीन डीएम के निर्देश पर सिटी मजिस्ट्रेट ने त्वरित कार्रवाई कराया था। जबकि पूर्व में रहे सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से बीते नवरात्र में ही पैसों की गिनती वाले स्थल पर सीसीटीवी कैमरा लगाने का निर्देश दिया गया था। बावजूद उसे गंभीरता से नहीं लिया गया था. इसी कारणवश उक्त दौरान पंडा-पुजारी भी बोल पड़े थे कि सीसीटीवी कैमरा लगा होता तो शायद पैसों की हेराफेरी न होने पाती.



