कोरोना संकट के दौरान अस्पताल व इलाज को लेकर कई संवेदनशील मामले मुंबई – थाना जिले से आ चुके हैं। कहीं अस्पताल मैनेजमेंट ने मौत के बाद लाश देने से इंकार कर दिया तो, कहीं भारी-भरकम बिल का हंगामा। ऐसे में विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के क्रांतिकारी पदाधिकारियों व समाजसेवी वर्ग ने मरीजों के परिवार या मरीज का ही साथ दिया। अस्पतालों को भी हंगामेदार धरना-प्रदर्शन से घुटनें टेकनें पड़े। अब तो संघर्ष का रिजल्ट यहां तक पहुंच गया कि प्राइवेट अस्पतालों के शुल्क जहां स्थानीय शासन ने निर्धारित कर दिया, वहीं कल्याण-डोम्बिवली शहर में प्राइवेट अस्पतालों पर भी शासनिक अधिकारी बतौर पर्वेक्षक नियुक्त हो चुके हैं। खैर..ऐसी विभिन्न समस्याओं के बीच सत्तासीन शिवसेना के पदाधिकारी भी खुलकर मरीजों के हित में संघर्ष करते हुए अस्पतालों को मानवता का पाठ सीखानें में जुटे हैं। फिलहाल आज हम एक अद्भुत घटना की जिक्र करने जा रहे हैं, जहां इलाज के दौरान ही भारी-भरकम बिल की भनक लगते ही कोरोना मरीज चुपके से भाग गया। अब अस्पताल उसके पीछे-पीछे बिल के लिए टहल रहा है..✍️
गौरतलब है कि कोरोना वायरस से हर कोई आतंकित हैं. यह वायरस इंसान के भीतर सीधे मौत का खौफ जो भर देता है। मगर निजी अस्पतालों से कोरोना मरीजों के लंबे-चौड़े बिलों की जो खबरें आ रही हैं, उसका खौफ भी कुछ कम नहीं है। ‘दोकासा’ खबर के मुताबिक निजी अस्पताल चंद दिनों में ही लाखों रुपए के बिल बना दे रहे हैं। अब आम आदमी कोरोना से बच भी जाए तो ये बिल उसकी जान खाए जा रहे हैं। यह घटना विरार पश्चिम स्थित विजय वल्लभ अस्पताल की है। इस अस्पताल में एक कोरोना संक्रमित मरीज भर्ती था। उसे पता चला कि उसका बिल डेढ़ लाख रुपए का हो चुका है। इसकी सूचना मिलते ही वह अस्पताल से भाग गया। इसी बीच मरीज व डॉक्टर के बीच हुई बातचीत का ऑडियो क्लिप वायरल हुई, जिसमें मरीज धमकी देता नजर आ रहा है कि ‘मैं सभी को संक्रमित कर दूंगा।’
यह है पूरा मामला – इस संक्रमित मरीज को इलाज के लिए १२ जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां पांच-छह दिन के उपचार के बाद उसकी हालत में कुछ सुधार आ गया। इसी दौरान जैसे ही रोगी को जानकारी मिली कि उसके उपचार का बिल डेढ़ लाख रुपए है, वह अस्पताल प्रबंधन से बातचीत करने के बहाने भाग निकला। जब डॉक्टर ने इसके बारे में मरीज से बात की तो वह सभी को संक्रमित करने की धमकी देने लगा। इन दिनों अस्पताल कोरोना मरीजों के उपचार को लेकर ज्यादा बिल की वसूली कर रहे हैं। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने इस मामले की जानकारी पुलिस व मनपा आरोग्य विभाग को देकर अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। अब तक भागे मरीज की तलाश नहीं की जा सकी है। मरीजों को लेकर की जा रही लापरवाही को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन के प्रति लोगों में नाराजगी है, जो अस्पताल की सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। विजय वल्लभ अस्पताल के डॉक्टर शैलेश पाठक का कहना है कि इस मरीज की जांच करनी बाकी थी, लेकिन वह बहाना बनाकर भाग निकला। बिल मांगने के लिए फोन किया तो उल्टा जवाब दे रहा है। इस मामले की जानकारी हमने प्रशासन को दी है।


