उत्तर प्रदेश में गोरखपुर-देवरिया यूपी सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है, जहां जिला अस्पताल में 13 वर्षीय किशोरी की मौत के बाद हड़कंप मच गया है। इसी के साथ ‘योगीगढ़’ में भी ‘बिचेत’ पड़े ‘स्वास्थ्य विभाग’ की ‘पोल’ भी ‘खुल’ चुकी है। अब यहां अस्पताल कर्मचारी ही संक्रमण के भय से सदमें में नजर आ रहे हैं।
गौरतलब है कि एक किशोरी को सांस लेने में तकलीफ थी और बुखार भी था। आनन-फानन में उसे आईसीयू के इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया था। वह करीब आठ घंटे तक अस्पताल में भर्ती थी। इस दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद भी उसकी कोरोना जांच नहीं हो सकी। देर रात ही शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद परिजन शव लेकर देवरिया के लार चले गए। घटना के बाद से ही कर्मचारी सकते में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देवरिया के लार निवासी 13 साल की किशोरी को परिजन शुक्रवार की शाम 7:15 बजे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। उसे सांस लेने में तकलीफ थी। खांसी भी आ रही थी। धड़कन भी तेज चल रही थी। साथ ही गले में दर्द भी था। फिलहाल विभिन्न जिलों में ठोस लक्षण के बावजूद भी जहां खून का स्वैब जांच करवाने में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोताही बरतने की खबरें उठती रही है, वहीं भदोही जनपद ने पिछले दिनों दो मृतकों की अंतिम यात्रा रोककर खून जांच हेतु लिया था जिसमें कोरोना पाॅजिटिव की पुष्टि हुई थी।
कोरोना जांच में लापरवाही – मौत के बाद भी किशोरी की कोरोना जांच नहीं हो सकी। डॉक्टरों के मुताबिक शुरुआती दौर में जो लक्षण थे, उस आधार पर किशोरी का कोरोना जांच के लिए नमूना लेना चाहिए था। लेकिन डॉक्टर तय नहीं कर सके कि कोरोना जांच कराई जाए या नहीं।
पीपीई की किल्लत – किशोरी की मौत के बाद कर्मचारी सकते है। पीआईसीयू और इमरजेंसी के कर्मचारी सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। वह पीपीई किट में नहीं थे। सुरक्षा के नाम पर सिर्फ कपड़े का मास्क और ग्लब्स उनके पास था। शनिवार को दिनभर यह चर्चा का विषय बना रहा।
- जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसके श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है। मरीज की हालत नाजुक थी। उसकी कोरोना जांच के लिए सैंपल क्यों नहीं लिया गया। इसे दिखवाया जाएगा।



