मजदूरों को गांव पहुंचाने के चक्कर में भगदड़ ऐसी मची कि विनय दूबे सलाखों तक पहुंच गया था, जिसके बाद मंगलवार को जमानत पर सलाखों में रहने के बाद रिहा भी हो गया। फिलहाल अब मजदूरों को मुसीबत मुक्त करके उन्हें गांव पहुंचाने की मुहिम में महाराष्ट्र व यूपी सरकार के मुखिया जुटे हैं।
गौरतलब लाॅकडाउन के दौरान मुंबई में बांद्रा रेलवे स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों की भीड़ जुटाने के आरोपी विनय दूबे को जमानत मिल गई है। बांद्रा की एक अदालत ने मंगलवार को दुबे को 15 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। मजदूरों को गांव पहुंचाने को व्याकुल विनय दूबे को 14 अप्रैल को बांद्रा रेलवे स्टेशन पर भीड़ जुटाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के बांद्रा में 14 अप्रैल को लोगों ने लॉकडाउन की धज्जियां उड़ा दी थीं। लॉकडाउन और सामाजिक दूरी के नियमों को धता बताते हुए हजारों प्रवासी मजदूर जमा हो गए थे। इसी तरह ठाणे के मुंब्रा में भी मजदूर सड़क पर आ गए थे। इस मामले में नवी मुंबई पुलिस ने विनय दुबे नामक एक शख्स को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि वह 18 अप्रैल को मजदूरों के बड़े विरोध प्रदर्शन की धमकी दे रहा था। लॉकडाउन के बीच विनय दुबे पर मजदूरों को गुमराह करने का आरोप है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा-188 और महामारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।



