लॉकडाउन में लोगों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तो हर तरफ बंदी है और कहीं पर कुछ भी खाने-पीने को नहीं मिल रहा है। जगह-जगह लगने वाले ठेले और खोमचों पर सन्नाटा है, जिससे खुले घूमने वाले कुत्ते एवं बंदर अब आम लोगों के लिए खतरा बनने लगे हैं। कहीं से कुछ भी खाने को न मिल पाने से भूख के मारे कुत्ते, बंदर अब आम लोगों को शिकार बना रहे हैं। जिससे कुत्ता, बंदर के काटने के मामले बढ़ गए हैं। उस पर दूसरी मुसीबत यह है कि अस्पतालों में वैक्सीन भी खत्म हो गई है।
गौरतलब है कि मथूरा की बात करें तो इन दिनों न कोई होटल खुल रहा है और न ही कहीं पर छोले, चाट या अन्य कोई खाद्य पदार्थ बिक रहा है, जिससे खुले घूम रहे कुत्तों को कहीं भी कुछ खाने को नहीं मिल रहा है। यही हाल बंदरों का है, ऐसे में उन्हें अगर कोई भी हाथ में थैला ले जाते दिख जाता है तो कुत्तों का झुंड झोले पर टूट पड़ता है। लॉकडाउन में ऐसे लोगों की संख्या बढ़ी है जिन्हें कुत्ते, बंदरों ने काटा है। अनेक लोग इनके शिकार बन रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक पिछले दस दिनों में करीब 125-150 घटनाएं कुत्ते, बंदरों के काटने के मामले सामने आए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोग इलाज कराने नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे लोगों की मुसीबतें अधिक बढ़ गई हैं। डॉ. गिरेंद्रपाल सिंह (सीएससी प्रभारी) कोसीकलां का कहना है कि भूख के चलते कुत्ते, बंदर उग्र हो रहे हैं। सीएचसी पर वैक्सीन का अभाव है, इसके लिए उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।



